हरियाणा के लोकगीतों में सौंदर्य चेतना

Vol-4 | Issue-02 | February 2019 | Published Online: 20 February 2019    PDF ( 175 KB )
Author(s)
मन्जू देवी 1

1शोधकत्र्री, हिन्दी विभाग दक्षिणी भारत हिन्दी प्रचार सभा मद्रास धारवाड़-580001

Abstract

लोकसाहित्य की रचना मूलतः ‘लोक’ में होती है । लोक साहित्य की प्रमुख विधाओं लोककथा, लोकगाथा, लोकोक्तियां, मुहावरे, लोकगीत आदि में से लोकगीतों की परम्परा अधिक समृद्ध रही है । जब किसी भी प्रदेश या देश के लोक साहित्य का अध्ययन करते हैं तो ज्ञात होता है कि उसका अधिकांशतः भाग पद्यात्मक है और उसमें भी विशेषकर गेय की उपयोगिता अधिक है । गेय व पद्यात्मक होने का एक खास कारण यह भी है कि जो भी लोक साहित्य सुरक्षित है, वह श्रवण व स्मरण के बल पर है । गद्य की अपेक्षा पद्य साहित्य सुगमता से कण्ठसथ होता है, क्योंकि गेयता में एक उमंग होती है, और जोश भी गेय लोक साहित्य जुबान पर जल्दी चढ़ जाता है तथा लम्बे समय तक कायम रहता है ।

Keywords
सौंदर्य चेतना, लोककथा, लोकसाहित्य, लोकगीतों की संवाद शैली
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