हिन्द महासागर में भारत-चीन शक्ति प्रतिस्पर्द्धा (मालदीव के विशेष संदर्भ में)

Vol-3 | Issue-11 | November 2018 | Published Online: 10 November 2018    PDF ( 263 KB )
Author(s)
डाॅ0 विजेन्द्र सिंह 1

1एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष; रक्षा एवं स्त्रातेजिक अध्ययन; सकलडीहा पी0 जी0 कालेज, सकलडीहा बाजार, चन्दौली, उ0 प्र0

Abstract

भारत एवं मालदीव के पुराने सांस्कृतिक सम्बन्ध रहे हैं। वर्तमान में यह छोटा द्वीपीय देश चीन एवं भारत की प्रतिस्पद्र्धा का शक्ति स्थल हो गया है। किन्तु स्वाभाविक रूप से मालदीव भारत का ही क्षेत्रीय सामुद्रिक विस्तार प्रतीत होता है। अतः मालदीव में किसी भी वाह्य शक्ति की उपस्थिति भारत के स्त्रातेजिक हितों के अनुरूप नहीं हो सकती है। चीन अफ्रीका में अपने व्यापारिक हितों एवं अन्य स्त्रातेजिक हितों के कारण हिंद महासागर में अपना विस्तार कर रहा है। मालदीव की आन्तरिक राजनीतिक स्थिति भी मालदीव में भारत-चीन प्रतिस्पद्र्धा को बढ़ावा दे रही है। कुशल भारतीय राजनय ही मालदीव में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करके भारतीय हितों की सुरक्षा कर सकता है। प्रस्तुत लेख का उद्देश्य मालदीव में भारत एवं चीन के हितों का परीक्षण एवं विश्लेषण कर भारत के लिए नीति-निर्माण हेतु उपयुक्त उपाय एवं सुझाव प्रेषित करना है।

Keywords
रणनीति, सामरिक, राजनय, मुक्त-व्यापार समझौता, स्ट्रिंग आफ पल्र्स, स्ट्रिंग आफ फ्लावर्स।
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