सार्वजनिक संपत्ति संसाधन के रुप में तालाब; कल, आज और कल (ग्रामीण बिहार का संदर्भ)
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 388 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| आलोक कुमार 1 | ||
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1शोध छात्र, गोविन्द बल्लभ पन्त सामाजिक विज्ञान संस्थान झूंसी,प्रयागराज |
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| Abstract | ||
यह पेपर बिहार के मींव-सुखारीपुर गांव के क्षेत्र सर्वेक्षण पर आधारित है। विभिन्न सामाजिक समूहों के साक्षात्कार व सार्वजनिक संपत्ति संसाधन के रुप में तालाब का अध्ययन करने पर यह देखने को मिला कि तालाब का वर्तमान और भविष्य लोगों की जरुरतों पर आधारित है। जिन समुदायों के लिए तालाब आजीविका का साधन है, उनके लिए भविष्य और जो दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति अन्य स्रोतों से कर लेते हैं, उनके लिए तालाब महज जमीन का टुकड़ा!! अतीत और वर्तमान के दुष्चक्र में फंसे तालाब का भविष्य भी संकट में है। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब जन जागरुकता के अभाव में विलुप्त होता जा रहा है। |
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| Keywords | ||
| तालाब, त्रासदी, सार्वजनिक संपत्ति संसाधन, जन जागरुकता, आजीविका। | ||
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