सामाजिक क्षेत्रों में महिला सहभागिता में शिक्षा का योगदान-एक अध्ययन

Vol-5 | Issue-8 | August-2020 | Published Online: 17 August 2020    PDF ( 407 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i08.021
Author(s)
पूनम कुमारी 1

1शोधार्थी़, इतिहास एवं भारतीय संस्कृति विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर

Abstract

स्त्रियां परिवार की मेरूदण्ड है। इनकी प्रगति पर हमारा सर्वांगीण विकास निर्भर करता है। शिक्षित स्त्रियां न केवल परिवार की उन्नति करती है बल्कि समाज को भी सुसंस्कृत व प्रगतिशील बनाने में सहायता करती है। स्त्री शिक्षा की प्रगति इस समाज व राष्ट्र के लिए आवश्यक है। आज की स्त्रियां देश का भाग्य बदलने में सक्षम हो रही हैं। आज नारी नवचेतना की भावना से ओतप्रोत है तथा वह समाज के प्रत्येक क्षेत्र में अपना यथासम्भव योगदान दे रही है।
नारी शिक्षा महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक एवं राजनीतिक सशक्तिकरण में सर्वाधिक महत्वपूर्ण अशिक्षा का निर्वहन करती है। देखा गया है कि शिक्षित एवं आर्थिक आत्मनिर्भर महिलायें परिवार के आकार एवं आर्थिक स्तर निर्माण में विनिश्चय कारक का कार्य करती है। शिक्षा द्वारा महिलाये एक तरफ तो एक बेहतर गृहणी बनती है तथा दूसरी तरफ एक उत्तम आर्थिक एजेन्ट का रुप धारण करती हैं। दुर्भाग्यवश, भारतवर्ष के ग्रामीण एवं अर्द्ध शहरी परिवेश तथा निम्न सामाजिक स्तरों पर महिला शिक्षा, फलतः आर्थिक सशक्तिकरण, अत्यन्त निम्न स्तरीय पाया जाता हैं। वर्तमान शोध पत्र एक अर्द्धशहरी-परिवेश में महिला शिक्षा, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी तथा परिवार के आकार में महिलाओं की भूमिका का सरल विश्लेषण करता है। सर्वेक्षण द्वारा प्राप्त सूचना के आकार पर निष्कर्ष निकाला गया है कि अध्ययनरत अर्द्ध शहरी-परिवेश में नारी शिक्षा की दशा सोचनीय है। शिक्षा का अभाव महिलाओं की आर्थिक शक्तियों को सीमित करता है, तथा शिक्षा तथा परिवार-आकार में सीधा सम्बन्ध है।

Keywords
महिला शिक्षा, आर्थिक योगदान, परिवार-आकार, सहभागिता, नारीवाद।
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