समकालीन साहित्य में कृषि और ग्रामीण जीवन
| Vol-4 | Issue-12 | December 2019 | Published Online: 16 December 2019 PDF ( 254 KB ) | ||
| Author(s) | ||
एकता देवी
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1सहायक आचार्य (हिंदी), संघवी मातुश्री पूरीबाई भूरमल जैन राजकीय महाविद्यालय, शिवगंज ( सिरोही ) |
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| Abstract | ||
भारत गाँवों का देश है | भारत की समृद्धि और विकास के विविध सोपानों में ग्रामीण सभ्यता का काल सर्वाधिक लम्बा रहा है | हजारों सालों में विकसित ग्रामीण सभ्यता के आस-पास समृद्ध साहित्य की रचना हुई | यह साहित्य कल्पना की उड़ान लेकर साहित्यकार के ह्रदय की अनुभूतियों से नि:सृत हुआ | साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं बल्कि दीपक भी है |वह दर्पण की भांति यथार्थ को बताता हुआ दीपक की भांति समाज के लिए प्रकाश भी फैलाता है | हिंदी साहित्य के सभी युगों में ग्रामीण जीवन का युग बोध हुआ है | वैदिक सभ्यता से ही हमें कृषि और ग्रामीण जीवन का पता चलता है | समकालीन साहित्य तो भारत की कृषि, ग्रामीण संस्कृति और सभ्यता की चेतना को समग्र रूप में प्रस्तुत करता है | भारत के ग्रामीण जीवन और कृषि के प्रति समकालीन साहित्यकार बहुत सजग दिखायी देता है | |
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| Keywords | ||
| समृद्धि, विकास, ग्रामीण सभ्यता, कृषि, ग्रामीण जीवन | ||
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Statistics
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