सतत विकास की अवधारणा में भारत में सौर ऊर्जा की संभावनाएं व चुनौतियां

Vol-3 | Issue-03 | March 2018 | Published Online: 14 March 2018    PDF ( 380 KB )
Author(s)
प्रो. (श्रीमती) कुशल जैन 1

1प्राध्यापक, अर्थशास्त्र, माता जीजाबाई स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय ,इंदौर (भारत)

Abstract

सतत विकास की अवधारणा आज हरीत ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) के विकास की अवधारणा पर आधरित हैं। भारत सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। अब भी देश के तीस करोड़ लोग बिजली से वंचित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाया जा सके तो इससे जीडीपी दर भी बढ़ेगी और भारत सुपर पावर बनने की राह पर भी आगे बढ़ सकेगा। दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि अगले तीन साल में देश में सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़कर 20 हजार मेगावाट हो जाएगा। वर्ष 2035 तक देश में सौर ऊर्जा की मांग सात गुनी बढ़ने की संभावना है। इस क्षेत्र में अपार संभावनाओं को देखते हुए अब विदेशी कंपनियों की निगाहें भी भारत पर हैं।

Keywords
हरीत ऊर्जा, संरक्षणवादी नीतियों, अक्षय ऊर्जा
Statistics
Article View: 1791