संत चरणदास जी के दार्शनिक विचारों में (भक्ति, समाज एवं विचारधारा)
| Vol-5 | Issue-4 | April-2020 | Published Online: 16 April 2020 PDF ( 115 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ. राजेन्द्र सिंह 1; पूनम सैनी 2 | ||
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1शोध निर्देशक, व्याख्याता (हिन्दी), श्री कल्याण राजकीय महाविद्यालय, सीकर, (राज.) 2शोधार्थी, हिन्दी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर (राज.) |
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| Abstract | ||
संत चरणदास जी और उनके अनुयायियों द्वारा विपुल साहित्य की रचना की गई उनमें मानवीय नैतिक एवं सामाजिक गुणों की प्रधानता देखने को मिलती है। मेरा ऐसा मानना है कि तत्कालीन समाज में मानवीय एवं नैतिक मूल्यों का सबसे ज्यादा अद्योपतन हुआ था। समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर कर मानवीय एवं नैतिक मूल्यों की स्थापना में इस सम्प्रदाय द्वारा किया गया प्रयास सराहनीय है। संत चरणदास जी ने अपने समय के समाज में व्याप्त धार्मिक, अंधविश्वासों, आडम्बरों, कुरूतियों और सामाजिक असमानता की तीखे शब्दों में आलोचना की। इस दृष्टि को रखते हुए संबंधित तथ्यों का विवेचन किया जा रहा है। |
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| Keywords | ||
| धार्मिक, अंधविश्वासों, नैतिक मूल्यों, आडम्बरों, कुरूतियों, अद्योपतन। | ||
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