वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स समूह देश का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का अन्तर्वाह: विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 581 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| मोनी सिंह 1 | ||
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1(शोध छात्रा), अर्थशास्त्र विभाग बयालसी पी. जी. कालेज जलालपुर, जौंनपुर, उत्तर प्रदेश -222001, भारत |
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| Abstract | ||
ब्रिक्स समूह देश क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं और राजनैतिक शक्तियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस शोधपत्र का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स समूह देशो की अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह के प्रवृत्ति का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना हैं। एफडीआई प्रवाह देश के आर्थिक विकास के लिए एक शक्तिशाली इंजन के रूप में स्वीकार किया जाता हैं। 1980 के दशक से एफडीआई (FDI) प्रभाव में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है, इन्हीं कारणों से वैश्विक बाजार और अधिक प्रतिस्पर्धी बन गया हैं। एफडीआई प्रवाह सभी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में एफडीआई प्रवाह के आकार और संरचना पर निर्भर करती हैं। ब्रिक्स समूह देश की अर्थव्यवस्था विदेशी निवेशकों को कई कारणों से आकर्षित करती हैं जैसे- युवा श्रम-शक्ति, सस्ती श्रम-शक्ति, प्राकृतिक संसाधन और बड़े बाजार का आकार इत्यादि। यूएनसीटीएडी (UNCTAD) रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एफडीआई प्रवाह वर्ष 2018 में 1.41 ट्रिलियन डॉलर से 1 प्रतिषत गिरावट के साथ वर्ष 2019 में 1.39 ट्रिलियन डॉलर हो गया। 1 ब्रिक्स समूह देष की एफडीआई प्रवाह वर्ष 2018 के 369.9 बिलियन डॉलर से घटकर वर्ष 2019 में 321.4 बिलियन डॉलर हो गया। 2 ब्रिक्स समूह देषों की अर्थव्यवस्थाओं में घरेलू बचतों और आवश्यकताओं (घरेलू मांग) में उपस्थित अंतराल के कारण विदेशी पूंजी के पर्याप्त आयात के बिना विकास करना संभव नहीं हैं। एफडीआई प्रवाह उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक विकास और विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालती हंै। |
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| Keywords | ||
| BRIC, BRICS, emerging world order, FDI Flow, UNCTAD, Developed Economy | ||
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