विश्व पटल पर हिंदी भाषा: चुनौतियाँ और विस्तार

Vol-6 | Issue-09 | September-2021 | Published Online: 15 September 2021    PDF ( 218 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i09.029
Author(s)
डा0 वन्दना शर्मा 1

1एसोसियेट प्रोफेसर-हिन्दी विभाग, मुलतानीमल मोदी काॅलेज, मोदीनगर (गाजियाबाद)-201204

Abstract

हिंदी भाषा शताब्दियों से हमारे चिर संचित शान, अद्भुत मेधा एवं हमारी प्रणम्य संस्कृति की वाहक रही है। हिंदी हमारे देश की संस्कृति एवं विज्ञानं के उत्थान में अभूतपूर्व योगदान है। हिंदी का उद्देश्य इसी तथ्य से प्रतिलक्षित होता है कि हमारी हिंदी संस्कार के प्रति उदार, लचीली, वैज्ञानिक लिपि के कारण अब विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर ह। हिंदी भाषी प्रवासी नागरिकों की संख्या करोंड़ों में है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार 180 देशो के 200 विश्व विद्यालयों में हिंदी का अध्ययन अध्यापन हो रहा है। एक अरब लोग हिंदी बोल व समझ रहे है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी का वर्चस्व बढ़ रहा है। हिंदी की उपबोलियाँ ही लगभग 300 है। हिंदी भारतीयता की वाहक है। विश्व में हिंदी का प्रचार-प्रसार किस-किस प्रकार सुदृढ़ हुआ है यह सब अब तथ्यपरक हो चुका है।

Keywords
आंतरिक एवं बाह्य चुनौतियाँ, मौलिक अनुदित पुस्तकें, योजनाबद्ध कार्यशालाए, मीडिया का वैश्विकरण संचार ओर प्रवासी भारतीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी का वर्चस्व, हिंदी की चुनौतियाँ, हिंदी की वैज्ञानिकता व ग्राहय्ता
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