विनोद मेहता: प्रयोगधर्मी संपादक
| Vol-5 | Issue-01 | January 2020 | Published Online: 16 January 2020 PDF ( 334 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.3784787 | ||
| Author(s) | ||
| डॉ. मनोजकुमार भी. पटेल 1 | ||
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1संशोधक |
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| Abstract | ||
श्री विनोद मेहता का जन्म 1941 में रावलपिंडी में हुआ था। विनोद ने सुनीता पोल नामक महिला पत्रकार से शादी की थी। इस दंपति को कोई संतान नहीं थी। उनकी मृत्यु 8 मार्च 2015 में दिल्ली में हुई थी। स्नातक तक पढ़ाई की थी। पढ़ाई में वह सामान्य थे (विकिपीडिया, एनडी टीवी खबर, 2015)। पढ़ाई के बाद विनोद नौकरी की तलाश में इंग्लैंड चले गए और 8 साल बाद लखनऊ वापस चले आए (एनडीटीवी खबर, 2015)। उनका आरंभिक जीवन संघर्ष पूर्ण एवं अनिश्चित रहा (एनडी टीवी खबर, 2015)। बाद में वह मुंबई चले गए। वहां विज्ञापन व्यवसाय में जुड़ गए (एनडी टीवी खबर, 2015)। 1973 में 'डेबोनियर' सामयिक के संपादक बने। यहां से उनकी कारकिर्दी को गति एवं सफलता मिली। 'डेबोनियर' के बाद विनोद ने 'संडे ऑब्जर्वर', 'इंडियन पोस्ट', 'इंडिपैंडेंट', 'पायनियर' एवं 'आउटलुक' में काम किया (एनडी टीवी खबर, 2015)। इनमें से विनोद ने कुछ अखबारों को चलाया, कुछ का आरंभ किया, सभी को संभाला और कामयाब बनाया। 'इंडियन पोस्ट' में काम करते वक्त विनोद ने देखा कि अखबार चलाने वाले लोगों के दूसरे व्यावसायिक हित कैसे प्रभावित होते हैं? और टाइम्स समूह के 'इंडिपैंडेंट' अखबार में काम करते वक्त यह अनुभव किया कि एक ही समूह के दो अखबारों के कर्मचारियों की मानसिकता का टकराव कैसा होता है? (एनडी टीवी खबर, 2015)। विनोद का अति सफल संपादक सफर 'आउटलुक' पत्रिका से शुरू हुआ जो कि जीवन पर्यंत रहा। विनोद ने इसे भारत में सफल एवं अलग पत्रिका बनाई। इस पत्रिका ने भारतीयों को असली पत्रकारिता का परिचय करवाया। विनोद ने 'आउटलुक' में कई चुनौतियों के बावजूद मैच फ़िक्सिंग, वाजपेई और आडवाणी के बीच टकराव, राडिया टेप जैसी कई अति महत्वपूर्ण खबरों को प्रकाशित किया था (एनडी टीवी खबर, 2015)। विनोद पत्रकारिता से संबंधित कई महत्वपूर्ण संस्थानों में बडे पदो पर आसीन रहे थे। उनका सामान्य पत्रिका से शुरू हुआ सफर कद्दावर संपादक के रूप में पूरा हुआ था। उनकी पत्रकारिता बेहद कामयाब, चमकदार एवं चर्चित रही। उनकी सभी पत्रिकाएँ दिखाव एवं सामग्री में विशिष्ट रही। पत्रकारिता की बिना कोई पृष्ठभूमि, शिक्षा एवं तालीम के बावजूद विनोद सफल रहे तो उसके पीछे उनका व्यावसायिक दृष्टि बिंदु, पाठकों के प्रति प्रतिबद्धता एवं उत्तरदायित्व था। इस वजह से उनका जीवन भी दिलचस्प रहा। विनोद स्पष्ट वक्ता एवं सच्चे आदमी थे। विनोद हिंदी अंग्रेजी पत्रकारिता के सेतु, भरोसेमंद संपादक, शानदार शख्सियत, खुद पर हसने वाले, खिलंदड़पन एवं पत्रकारिता के लिए अपनों की परवाह न करने वाले संपादक थे (बीबीसी हिंदी, 2015)। वह खुद पर एवं दूसरों पर बेबाकी से लिखते थे (बीबीसी हिंदी, 2015)। विनोद अपने मालिकों एवं उनके संबंधियों के प्रति वफादार रहते थे लेकिन जब पत्रकारिता की बात आती थी तो वह पत्रकारिता के पक्षधर बन जाते थे (बीबीसी हिंदी, 2015)। विनोद 24 घंटे काम करते थे। वह ईमानदार थे। उन्होंने अपने पद एवं हैसियत का कभी फायदा नहीं उठाया था। विनोद सरकार की समीक्षा के पक्षधर थे। विनोद ने जिसे छुआ उसे कामयाबी मिली ( बीबीसी हिंदी, 2015)। उन्हों ने पत्रकारिता के अलावा छः किताबें भी लिखी थी जो कि चर्चित रही थी (बीबीसी हिंदी, 2015)। विनोद ने पत्रकारिता में संपादक के रूप में प्रवेश किया था और संपादक पद पर रहते हुए विदा ली थी। |
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| Keywords | ||
| विनोद मेहता, संपादक, कामकाज, पत्रिकाएं | ||
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