माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता एवं शैक्षिक रूचियों का लिंग-भेद तथा विद्यालय के स्वरूप के परिपे्रक्ष्य में अध्ययन
| Vol-3 | Issue-06 | June 2018 | Published Online: 19 June 2018 PDF | ||
| Author(s) | ||
| डा. भूपेन्द्र सिंह 1 | ||
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1प्राचार्य, जी.एस. काॅलेज आॅफ एज्युकेषन, लुहारी, झज्जर (हरियाणा) |
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| Abstract | ||
प्रत्येक बालक कुछ विषिष्ट शक्तियों को लेकर जन्म लेता है और इन्हीं अन्तर्निहित शक्तियों में सृजनात्मकता भी एक शक्ति है जो एक विषेष ढंग से चिन्तन करने का तरीका होती है। जिसे सृजनात्मक चिन्तन कहा जाता है। यह शक्ति बालक की चिन्तन शैली में, अध्ययन में, खेलकूद में, घटनाओं के स्मरण करने में, किसी समस्या के समाधान में, सामाजिक अन्तःक्रियाओं में तथा अन्य किसी भी कार्य में देखी जा सकती है। सृजनषीलता को यदि स्वस्थ वातावरण मिलता है तो यह पनप जाती है अन्यथा समाप्त हो जाती है। सृजनात्मकता का षिक्षा से गहरा सम्बंध होता है और षिक्षा का रूचि के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध होता है क्योंकि रूचि के अनुसार षिक्षा प्राप्त की जाती है। फलतः सृजनात्मकता और शैक्षिक रूचि में गहरा सम्बन्ध होता है। क्योंकि जब कोई सृजनषील बालक अपनी रूचि के विषय विज्ञान व वाणिज्य को पढता है तो वह आगे चलकर महान वैज्ञानिक या महान अर्थषास्त्री बन सकता है। जब हम बालक के सामने अनेक खिलौने रखते हैं तब वह उनमें से किसी एक खिलौने को उठा लेता है यहाॅ रूचि ही वह कारक है जो बालक को वह विषिष्ट खिलौना उठाने के लिए पे्ररित करती है। रूचि ही वह अभिपे्ररक शक्ति है जो किसी क्रिया की ओर ध्यान देने को बाध्य करती है। माध्यमिक स्तर पर बालक को अनेक वैकल्पिक विषयों में से उपयुक्त विषय का चयन करना होता है क्योकि किषोरावस्था में बालक की सृजनात्मकता और शैक्षिक रूचि पर परिवार, विद्यालय, षिक्षक, लिंग, मित्र-मण्डली आदि सभी का प्रभाव देखने को मिलता है। अतः प्रस्तुत अध्ययन एवं प्रयास है यह जानने का, कि क्या विद्यार्थियों की सृजनात्मकता एवं शैक्षिक रूचियों पर उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर, लिंग एवं विद्यालय का कोइ्र्र प्रभाव पडता है अथवा नहीं। |
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| Keywords | ||
| सृजनात्मकता और शैक्षिक रूचि। | ||
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