भारत में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछडे वर्गो का विकास एवं गठित आयोग: एक समीक्षात्मक लेख
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 227 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| विनीता 1 | ||
|
1शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग NILM विश्वविद्यालय, कैथल (हीरयाणा) |
||
| Abstract | ||
इस शोध-पत्र में ‘सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गो के विकास एवं गठित आयोगों को (ओबीसी) रूप में वर्णित किया गया है ‘अन्य पिछडा वर्ग‘ अथवा ‘अदर बैकवर्ड कलासेज‘ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से अलग एक कोटि है, जिसमें शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछडे समुदायों की गणना की जाति है। भारतीय संविधान जैसा कि प्रस्तावना से स्पष्ट है, एक सुप्रभु, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना को अपना लक्ष्य घोषित करता है। यह एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना करना चाहता है जिसमें प्रत्येक वर्ग की सŸाा में भागीदारी हो। संविधान सभा में इस बात पर विचार-विमर्श हुआ कि समाज के कमजोर, पिछडे वर्गो को सामान्यजनों के लगभग समक्ष लाकर दी एक समतावादी समाज की स्थापना के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए सविधान में अनेक प्रावधान किये गये तथा इस शब्द को परिभाषित किया गया कि किन जातियों को इस वर्ग में शामिल किया जाये। इन वर्गो को अन्य व्यक्तियों के समक्ष लाने के लिए कई आयोग गठित किये गये जिनमें काका कालेकर आयोग 1953, मण्डल आयोग 1978 तथा राष्ट्रीय पिछडा वर्ग आयोग 1993 गठित किये गये। जिन्होंने अपनी अलग-अलग सिफारिशें दी। स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर अब तक निम्न जातियों की दशा को सुधारने के लिए अनेक प्रावधान किये गये परंतु इनकी दशा में अधिक सुधार नहीं हुआ है और ये आज भी प्रायः गरीबी तथा शोषण का शिकार है। |
||
| Keywords | ||
| सामाजिक, शैक्षिक, राष्ट्रीय पिछडा वर्ग आयोग, मण्डल आयोग, पिछडा वर्ग, आरक्षण, जातियाँ, वर्ग | ||
|
Statistics
Article View: 790
|
||

