भारत द्वारा मसाले के निर्यात का एक आलोचनात्मक विश्लेषण (वर्ष 2000 के पश्चात)
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 472 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ0 ऋषि विवेकधर 1; दुर्गेश कुमार 2 | ||
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1असिस्टेंट प्रोफेसर, ए0एन0एम0 पी0जी0 काॅलेज, बलिया 2शोध छात्र अर्थशास्त्र विभाग, नेहरू ग्राम भारती डीम्ड विश्वविद्यालय कोटवा जमुनीपुर प्रयागराज |
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| Abstract | ||
भारत के कृषिगत वस्तुओं के निर्यातों में मसाले की भूमिका प्राचीन समय से ही महत्वपूर्ण रही है। भारत द्वारा मुख्य रूप से काली मिर्च, लाल मिर्च, हल्दी, अदरक, धनिया, जीरा, सौंफ, मेथी और दालचीनी इत्यादि का विश्व के अन्य देशों को निर्यात किया जाता रहा है। मसालें के निर्यात में सर्वाधिक योगदान केरल राज्य द्वारा किया जाता रहा है। मसालें के निर्यात में सर्वाधिक योगदान केरल राज्य द्वारा किया जाता रहा है। प्राचीन समय में भारतीय मसालें का व्यापार रोम व चीन के साथ होता था और वर्तमान समय में भी इनका वैश्विक स्तर पर व्यापार किया जाता है। भारत का घरेलू मसाला बाजार विश्व का सबसे बड़ा बाजार है और भारत द्वारा कुल 109 में से 75 प्रकार के मसालें का निर्यात किया जाता है जो आई0एस0ओ0 (प्ैव्) में दर्ज हैं। |
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| Keywords | ||
| कृषिगत, हल्दी, अदरक, धनिया, जीरा | ||
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Statistics
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