बिहार के गया जिला में ग्राम पंचायती राज व्यवस्था के समक्ष चुनौतियां और उसका समाधान: एक सर्वेक्षणात्मक अध्ययन

Vol-3 | Issue-08 | August 2018 | Published Online: 07 August 2018    PDF ( 145 KB )
Author(s)
मंजू कुमारी 1

1सहायक शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय, उत्तरी सैदपुर, महेन्द्रू पटना।

Abstract

ग्राम पंचायती राज व्यवस्था स्वायत्त शासन की मुख्य इकाई है और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की प्रमुख एजेंसी भी है। यह संपूर्ण भारतवर्ष में जनतांत्रिक विकेन्द्रीकरण पद्धति का सबसे सशक्त और उपयुक्त माध्यम है। इसके परिणामों के आधार पर भविष्य के राजनीतिक निर्णयों का विश्लेषण किया जा रहा है। सदियों से राजनीतिक सत्ता से वंचित महिलाओं को इस व्यवस्था के माध्यम से हिस्सेदारी का अवसर प्राप्त हुआ है। पंचायती राज व्यवस्था से सिर्फ राजनीतिक सुधार ही नहीं बल्कि सामाजिक सुधार भी दृष्टिगोचर हुए हैं। बावजूद इसके बिहार में यह व्यवस्था अपेक्षित परिणामों को प्राप्त नहीं कर सका है। यह उन व्यक्तियों और वर्गों तक सिमट कर रह गया है जो पंचायतों में राजनीतिक प्रभुत्व रखते हैं। अतः इस शोध-आलेख का केन्द्रीय विषय बिहार राज्य में पंचायती राज व्यवस्था के समक्ष उभरती हुई चुनौतियों का अध्ययन करना है और उसके निराकरण के लिए आवश्यक सुझाव भी देना है। प्रस्तुत आलेख द्वारा बिहार राज्य के गया जिला के विभिन्न ग्राम पंचायतों के निर्वाचित महिला ग्राम प्रधानों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर वास्तविक स्थिति को जानने का प्रयास किया गया है।

Keywords
स्वायत्त शासन, जनतांत्रिक विकेन्द्रीकरण, क्रियान्वयन, राजनीतिक प्रभुत्व
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