नक्सलवादः भारत की आन्तरिक सुरक्षा के समक्ष मुख्य चुनौती
| Vol-4 | Issue-02 | February 2019 | Published Online: 20 February 2019 PDF ( 205 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| रेनू बाला 1 | ||
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1राजनीति विज्ञान विभाग महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक |
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| Abstract | ||
नक्सलवाद की सफलता का बड़ा कारण आम जनता का सहयोग है और भेदभावपूर्ण नीतियां है इसलिए सरकार का चाहिए कि वह पिछड़े इलाकों में तीव्र गति से विकास करें, पिछडे तबको को मुख्यधारा से जोडें ताकि आम जनता नक्सलवादियों का सहयोग बंद करके सरकार का सहयोग करे। ताकि नक्सलवाद के प्रसार को रोका जा सकें। पिछले कुछ समय से नक्सलवादियों ने घटनाआंे को कितने आसानी से अंजाम दिया है। यह इनकी बढ़ती ताकत का ही नमूना है और इसकी बढती ताकत का अहसास करवाता है। हाल की इन सब घटनाओं ने यह दर्शाया कि नक्सलवाद ने भारत के विभिन्न राज्यों में अपनी जडें काफी मजबूत कर ली है। आज भारत की आन्तरिक सुरक्षा के लिए अन्य खतरों के साथ यह भी बडा खतरा है। अतः नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए वहुस्तरीय कारवाई करने की आवश्यकता है। ताकि भारत जैसी उभरती हुई शक्ति अपने आन्तरिक मामलों में उलझ कर पिछडेपन की और अग्रसर न हो जाएं। इस शोध पत्र में वर्णात्मक शोध प्रद्वति का सहारा लिया गया है। इस शोध पत्र का उदेश्य नक्सलवाद किस प्रकार भारतीय आन्तरिक सुरक्षा को खतरा पैदा करती है। कार्बन किया गया है। |
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| Keywords | ||
| नक्सलवाद, सलवाजुडूम, कोबरा, आपरेशनग्रीनहटं, ग्रेहाउण्डस, महाजन, जमींदार, आन्तरिक सुरक्षा, मुख्य धारा आदि | ||
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