दलित बस्तियों में रहने वाली महिलाओं के स्वास्थ्यः एक चुनौती
| Vol-2 | Issue-8 | August 2017 | Published Online: 28 August 2017 PDF ( 125 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ0 अर्चना कुमारी 1 | ||
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1सहायक प्रोफेसरए रमेश झा महिला काॅलेज, सहरसा |
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| Abstract | ||
आज भी दलित महिलाओं के बीच अशिक्षा एवं निरक्षरता व्यापक रूप में फैली हुई है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद दलित महिलाओं के बीच शिक्षा के विकास के महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रमों के उपरान्त भी संतोषजनक सुधार नहीं हो पाया है। जहाँ तक दलित महिलाओं के बीच स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याओं का प्रश्न है तो यह कहना अनुचित नहीं होगा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रमुख आधार शिक्षा है। जाहिर है कि शिक्षा के अभाव के कारण दलित महिलाएँ स्वास्थ्य संबंधी समस्या से निदान पाने में असमर्थ रहती हैं। सामान्य रूप से महिलाओं में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के अतिरिक्त प्रसूति, प्रजनन एवं कुपोषण की विशेष समस्या है। गर्भावस्था में सामान्यतया बच्चे का स्वास्थ्य माता-पिता के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। दलित महिलाओं में व्याप्त निर्धनता के कारण समुचित पोषाहार नहीं मिल पाता है, जिसके फलस्वरूप कुपोषण और समुचित चिकित्सा के अभाव में कई महिलाओं का निधन बच्चे को जन्म देते समय ही हो जाती है। बच्चे के जन्म के बाद भी महिलाओं को विशेष देखभाल तथा समुचित पोषाहार की आवश्यकता पड़ती है परन्तु निर्धनता के कारण दलित महिलायें इस प्रकार की सुविधाओं से वंचित रह जाती हैं। अनेक महिलाओं का स्वास्थ्य अधिक बच्चों के जन्म देने के कारण गिर जाता है। अज्ञानता एवं अन्धविश्वास के कारण समाज के अनेक महिलायें विशेषकर दलित महिलायें केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा संचालित परिवार नियोजन कार्यक्रम का लाभ नहीं उठा पाती हंै। अतः परिवार जीवन के दुस्कर एवं अनवरत कार्यों, समुचित देखभाल और विश्राम के अभाव, पोषाहार की कमी, अशिक्षा तथा चिकित्सा सुविधा के अभाव के कारण ये महिलाएँ विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाती हैं और उनमें कई का निधन अकाल मृत्यु के रूप में हो जाती है। |
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| Keywords | ||
| स्वास्थ्य, शिक्षा, अज्ञानता, दलित महिला | ||
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Statistics
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