छत्तीसगढ़ राज्य में रेषम उद्योग के विकास हेतु संचालित शासकीय योजनाएँः एक अध्ययन
| Vol-4 | Issue-7 | July 2019 | Published Online: 15 July 2019 PDF ( 481 KB ) | ||
| Author(s) | ||
डाॅ. मोना चैहान
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1सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) षास. काव्योपाध्याय हीरालाल महाविद्यालय अभनपुर, जिला - रायपुर |
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| Abstract | ||
रेशम, रसायन की भाषा में रेशम कीट के रूप में विख्यात इल्ली द्वारा निकाले जाने वाले प्रोटीन से बना तन्तु है इसका उपयोग वस्त्रों की बुनाई में किया जाता है। पूरे एशिया में केवल भारत ही एक ऐसा देश है जहाॅ व्यावसायिक महत्व की चारो रेशम कीट प्रजातियाँ पाई जाती है। छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक स्थिति में तीन प्रकार के रेशम (टसर, मलवरी व ईरी) प्रजातियों का उत्पादन होता है यहाँ पर उत्पादित रेशम उच्च गुणवत्ता का होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग अत्यधिक है अतः राज्य शासन द्वारा रेशम उद्योग के विकास हेतु कई याजनाएँ संचालित की गई है जिसके द्वारा अधिकतम मात्रा में रेशम उत्पादन कर ग्रामीण एवं अनुसूचित जाति व जनजाति के निर्धन परिवारों को स्वरोजगार प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है, टसर रेशम को बढ़ावा देने हेतु जशपुर जिले में विजन 2020 के तहत आगामी 5 वर्षो में 80 मेट्रिक टन यार्न की आपूर्ति प्रदेश में किया जाना है। इस हेतु फरसाबहार, कुनकुरी, कांसाबेल, दुलदुला विकास खण्ड में 20 क्लस्टर में नर्सरी मंे 14 लाख पौधे तैयार किये गए है वर्ष 2020 तक 24.36 करोड़ ककून उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। आगामी 5 वर्षो में लगभग 15000 परिवार प्रति वर्ष लाभान्वित होंगे। वर्तमान में छत्तीसगढ़ देश के झारखण्ड राज्य के बाद सर्वाधिक टसर उत्पादक राज्य है। |
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| Keywords | ||
| ककून, हितग्राही, तसर, मलवरी | ||
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Statistics
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