गुप्तोत्तर कालीन बिहार में राज्य और अर्थव्यवस्था: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Vol-2 | Issue-8 | August 2017 | Published Online: 28 August 2017    PDF ( 127 KB )
Author(s)
श्वेत निशा शर्मा 1

1 स्नातकोत्तर इतिहास विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर

Abstract

बिहार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक राज्य है और इसकी राजधानी पटना है। बिहार नाम का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासियों के ठहरने के स्थान विहार शब्द से हुआ, जिसे विहार के स्थान पर इसके अपभंश रूप बिहार से संबोधित किया जाता है। बिहार के उत्तर में नेपाल, दक्षिण में झारखण्ड, पूर्व में पश्चिम बंगाल, और पश्चिम में उत्तर प्रदेश स्थित है। यह क्षेत्र गंगा नदी तथा इसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है। प्राचीन काल में विशाल साम्राज्यों का गढ़ रहा यह प्रदेश, वर्तमान में अर्थव्यवस्था के आकार के आधार पर भारत के राज्य के सामान्य योगदाताओं में से एक बनकर रह गया है। भारत की पहली साम्राज्य, मौर्य साम्राज्य द्वारा नंद वंश को बदल दिया गया था। मौर्य साम्राज्य और बौद्ध धर्म का इस क्षेत्र में प्रभाव रहा है जो अब आधुनिक बिहार को अधिक वैभवशाली बना देता है। 325 ईसा पूर्व में मगध से उत्पन्न मौर्य साम्राज्य चंद्रगुप्त मौर्य ने स्थापित किया था। पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) में इसकी राजधानी थी। मौर्य सम्राट अशोक जो पाटलिपुत्र (पटना) में पैदा हुए थे, को दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा शासक माना जाता है। मौर्य सम्राज्य भारत की आजतक की सबसे बड़ी सम्राज्य थी। यह पश्चिम में ईरान से लेकर पूर्व में वर्मा तक और उत्तर में मध्य-एशिया से लेकर दक्षिण में श्रीलंका तक में फैला था। गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद, उनके गृह प्रांतों में शासकों की एक लंबी लाइन लग गयी थी। एक को छोड़कर इन सभी के नामों के अंत में गुप्त आता था। इसलिए यह परिवार इतिहास में मगध के शासन के बाद ”गुप्त“ के नाम से जाना जाता है। यह तय कर लेना कि वे किसी भी तरह से शाही गुप्त के साथ जुड़े हुए थे, राजवंश उत्पन्न हुए। जैसे-कन्नोज के मौखरी, कामरूप के वर्मन, थानेश्वर के पुष्पभूति आदि। गुप्त काल के बाद भारतीय समाज में कई महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए। पांचवीं सदी ईस्वी के बाद से भारत में भूमि अनुदान ने सामंती विकास में मदद की। किसान सामंती अधिपतियों के लिए दी गई भूमि में बसे हुए थे। इनमें जिन गांवों को स्थानांतरित कर दिया गया था उन्हें ‘स्थान-जन-संहिता’ और ‘समरिद्धा’ के नाम से जाना जाता था। गुप्त काल के बाद की अवधि में व्यापार और वाणिजय में गिरावट के कारण वहां की अर्थव्यवस्था एक बंद अर्थव्यवस्था में तब्दील हो चुकी थी। सामंती समाज के विकास ने राजा की स्थिति कमजोर कर दी थी। जिस कारण राजा को सामंती प्रमुखों पर अधिक निर्भर रहना पड़ता था। सामंती प्रमुखों का वर्चस्व बढ़ने लगा था जिसके परिणामस्वरूप गांव का स्वशासन कमजोर हो गया था।

Keywords
बिहार, गुप्तकाल, अर्थव्यवस्था, वाणिज्य-व्यापार, राजस्व प्रबन्धन
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