कौटिल्य की कराधान व्यवस्था पर पूर्ववर्ती भारतीय अर्थशास्त्रियों का प्रभाव
| Vol-2 | Issue-4 | April 2017 | Published Online: 12 April 2017 PDF | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Rekha Mishra 1; Dr. Bhavna Pareek 2 | ||
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1Lecturer Hindi, Government College, Newai, (Tonk) Rajasthan 2Lecturer (History), S.R.L. Sahariya P.G. College, Kaladera, (Jaipur) Rajasthan |
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| Abstract | ||
पुरातन आचार्यों के अनुसार भारतीय आर्थिक विचारों का प्रारम्भ उस समय से माना जाता है जबसे मनुष्य ने अपने विचारों को लिखकर अभिव्यक्त करना सीखा। प्राचीन काल से भारतीय आर्थिक समस्याओं पर विचार होता रहा है किन्तु इसे एक पृथक विज्ञान के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष प्रयास कौटिल्य में ही दिखाई देते है। इन आर्थिक विचारों के प्रमुख स्त्रोत वेद, वेदों पर आधारित उपनिषद, पुराण, मनुस्मृति, यजनावालिम्य, महाभारत, गौतम, नारद, शुक्र, भीष्म पितामह और विदुर नीतियां है। |
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| Keywords | ||
| कौटिल्य, अर्थशास्त्र, राजशास्त्र, समाजशास्त्र, नीतिशास्त्र, विधिशास्त्र | ||
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