किराना एवं इन्दौर घराने में आश्रय राग कल्याण थाट की बन्दिशों का साहित्यिक एव सांगीतिक विश्लेषण
| Vol-6 | Issue-03 | March-2021 | Published Online: 15 March 2021 PDF ( 176 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i03.019 | ||
| Author(s) | ||
श्रेया भारद्वाज
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1पी.एच.डी शोधार्थी, संगीत विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय समरहिल शिमला (171005) |
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| Abstract | ||
उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत में समृद्ध घरानागत परम्परा के अन्तगर्त किराना एवं इंदौर घरानारागों की बन्दिशों की परम्परागत शैली के सरक्षण व संवर्धन कर रहे हैं।।हिंन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में रागदारी संगीत मुख्यतः भातखण्डे जी ़द्वारा बताए गए दस थाटों में समाहित है जिसमे कल्याण एक महत्वपूर्ण,प्रचलित व सर्वप्रथम सिखाया जाने वाला आश्रय थाट है जिसका जन्य या आश्रय राग कल्याण है। इसे ईमन, एमन व यमन के नाम से जाना जाता है। प्रस्तुत शोध पत्र में किराना व इंदौर घराने की कल्याण की साहित्यिक व सांगीतिक तत्वों को उजागर किया गया है। जैसे इदौर घराने की उस्ताद अमीर खां जी की "कजरा कैसे डारूं", "शाज़-ए-करम" ग, अवगुन न कीजे गुणी सन। किराना घराने की गंगूबाई हंगल की काहे बजाई कान्हा बांसुरी, मोरी गगरिया भरन दे। इन बंन्दिशों में साहित्य व संगीत का अनूठा संगम है।ये रचनाएं भावपूर्ण,सन्देशात्मक, आध्यत्मिकता से ओत प्रोत हैं, व राग यमन की धातु और मातु पक्ष को उजागर कर रही है। |
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| Keywords | ||
| आश्रय राग कल्याण, बन्दिश, संगीत एवं साहित्य, किराना घराना इंदौर घराना | ||
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