भारत में महिला सशक्तिकरण: एक विवेचनात्मक अध्ययन
| Vol-5 | Issue-10 | October-2020 | Published Online: 15 October 2020 PDF ( 243 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i10.004 | ||
| Author(s) | ||
सर्वेजीत मीणा
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1सहायक आचार्य-समाजषास्त्र राजकीय महाविद्यालय हिण्डौनसिटी करौली |
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| Abstract | ||
किसी भी राष्ट्र के निर्माण में उस राष्ट्र की आधी आबादी (स्त्री) की भूमिका की महत्ता से इन्कार नहीं किया जा सकता। आधी आबादी किसी भी कारण से निष्क्रिय रहती है, तो उस राष्ट्र या समाज की समुचित एवं उल्लेखनीय प्रगति के बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती। महिलाओं की स्थिति वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल तक ठीक थी परन्तु मध्यकाल आते-आते समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों ने स्त्रियों की स्थिति को अधिक बदतर कर दिया। वाह्य आक्रमणकारीयों, अन्तर देशीय व्यापार, मुगल शासन, केन्द्रीय सत्ता का विनष्ट होना और शासको की विलासीता पूर्ण पद्धति ने महिलाओं को उपयोग की वस्तु बना दिया जिससे उनकी स्वतन्त्रता, शिक्षा तथा उनके अधिकार बाधित होने लगे। जिसके कारण अनेक कुरीतियाँ व्याप हो गयी। महिलाओं की इन स्थितियों के दूर करने तथा उनको मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्वतन्त्रता पूर्वक अनेक समाज सुधारकों तथा महिला संगठनों ने अनेक प्रयास किये जिसके परिणाम स्वरूप सती प्रथा पर रोक, विधवा पुनर्विवाह इत्यादि कुरीतियाँ दुर हुई। स्वतन्त्रता पश्चात महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक सवैधानिक प्रयास, कल्याणकारी योजनाओं तथा नीतियों से महिलाओं से मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। |
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| Keywords | ||
| महिला सशक्तिकरण, सवैधानिक प्रयास, योजना तथा नीति द्वारा प्रयास, समाज सुधारकों द्वारा किया गया प्रयास। | ||
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