निराला का व्यक्तित्व और कृतित्व
| Vol-5 | Issue-9 | September-2020 | Published Online: 15 September 2020 PDF ( 350 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i09.025 | ||
| Author(s) | ||
| डॉ. माधवी 1 | ||
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1सहायक प्राचार्य, हिंदी विभाग, गंगा सिंह कॉलेज (छपरा) |
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| Abstract | ||
सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” का व्यक्तित्व विरोधों का सामंजस्य है| आदर्श और यथार्थ, राग-विराग, दुख:-आनंद व प्रवृत्ति-निवृत्ति इत्यादि जीवन की विविधता निराला जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व में देखी जा सकती है, इसलिए यह किसी एक निश्चित “वाद” के कवि ना होकर, अनुभव-यथार्थ के कवि हैं| इनकी कविता 1916 से लेकर 1961 तक विभिन्न आयामों में दिखाई देती है| छायावाद के दौर में प्रगतिवाद रचनाएं तो प्रगतिवाद के समय मार्क्सवादी कविता इत्यादि देखने को मिलती है| |
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| Keywords | ||
| सामंजस्य, यथार्थ, प्रवृत्ति-निवृत्ति | ||
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