भूगोल शिक्षण की नवाचारी प्रवृत्तियाँ – समस्याएँ एवं संभावनाएँ: भागलपुर अनुमंडल के +2 विद्यालयों के संदर्भ में विश्लेषण
| Vol-5 | Issue-9 | September-2020 | Published Online: 15 September 2020 PDF ( 318 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2020.v05.i09.008 | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ0 संजीव कुमार 1 | ||
| Abstract | ||
भूगोल सामाजिक विज्ञान का एक सशक्त विषय है। इसका विषय-क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। यह भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान के मध्य सेतु का कार्य करता है। इसमें पृथ्वी के भौतिक एवं मानवीय तथ्यों का अध्ययन किया जाता है। भूगोल शिक्षण में कार्य-कारण सम्बन्धों का विश्लेषण और पृथ्वी सतह पर घटित होने वाली घटनाओं की जानकारी मिलती है। अतः प्रभावी, बोधगम्य एवं सुरूचिपूर्ण शिक्षण के लिए नवाचारों का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। इसकी आधुनिक प्रवृत्ति परंपरागत से भिन्न ळें भौगोलिक दृष्टि से बिहार के पूर्वी भाग में स्थित अंगप्रदेश में भागलपुर एक कृषि प्रधान जिला है जिसको गंगा नदी दो भागों में विभक्त करती है। इस जिले में तीन अनुमंडल तथा 16 प्रखंड सह अंचल हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार भागलपुर अनुमंडल की कुल जनसंख्या 1448638 है तथा साक्षरता 67.85% है। प्रतीक अध्ययन क्षेत्र भागलपुर अनुमंडल में कुल +2 विद्यालयों की संख्या 35 है। विद्यालय कई कोटि के हैं, जैसे राजकीय, राजकीयकृत, परियोजना, कल्याण विभाग द्वारा संचालित, अल्पसंख्यक आदि। +2 स्तर पर भूगोल कला संकाय के अंतर्गत एक ऐच्छिक विषय है। +2 विद्यालयों के समक्ष कई चुनौतियाँ हैं यथा-सुयोग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, प्रयोगशाला, पुस्तकालय आजायबघर, शिक्षण सामग्री का अभाव आदि। इन समस्याओं के समाधान के पश्चात् ही उत्कृष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संभव है। नवाचारी प्रवृत्तियों के अनुप्रयोग की नितांत आवश्यकता है तभी भूगोल जैसे गूढ़ विषय की शिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। |
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| Keywords | ||
| नवाचारी, प्रवृत्तियाँ, बोधगम्य, व्यापक, गूढ़ | ||
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