21वीं सदी में भारत – चीन सम्बन्ध

Vol-4 | Issue-5 | May 2019 | Published Online: 25 May 2019    PDF ( 218 KB )
Author(s)
विजय शंकर चौधरी 1

1शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग गोवा विश्वविद्यालय, गोवा

Abstract

भारत- चीन संबंध प्राचीन काल से ही रहे हैं। इन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं आर्थिक संबंधों की लंबी श्रृंखला रही है। आज दोनों बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश बन चुके हैं और दोनों एक दूसरे के पूरक भी  हो गये हैं। 1959 में तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद दोनों के बीच कटुता पैदा हो गयी जो 1962 में भारत पर चीनी आक्रमण के बाद पराकाष्ठा पर पहुंच गई। इतना ही नहीं, चीन ने पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल आदि देशों के साथ विशेष संबंध बनाकर भारत को घेरने की नीति अपना ली। सारे विवादों की शुरुआत वस्तुतः दोनों देशों के बीच सीमा के प्रश्न पर शुरू हुई और आज कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों में विवाद रहे हैं। चीन की विस्तारवादी नीति दोनों के बीच खटास का एक मुख्य कारण है। भारत की बढ़ती आर्थिक, सामरिक शक्ति चीन की आंखों में गर रही है। फलतः आतंकवाद, कोरोना एवं दक्षिण एशिया समुद्र जैसे मामलों पर चीन ने भारत विरोधी रुख अख्तियार कर लिया है। जब तक चीन अपनी नीति और नीयत में परिवर्तन नहीं करता तब तक दोनों के बीच मित्रता का होना संभव नहीं  होगा।

Keywords
सीमा विवाद, निर्माण कार्य, निवेश, विस्तार वादी, महत्वकांक्षा, संघर्ष।
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