21वीं सदी के बदलते परिवेश मे चीनी सामरिक घेराबंदी का भारत पर प्रभाव
| Vol-4 | Issue-7 | July 2019 | Published Online: 15 July 2019 PDF ( 119 KB ) | ||
| Author(s) | ||
डाॅ. संजय कुमार शर्मा
1
|
||
|
1व्याख्याता राजनीति विज्ञान |
||
| Abstract | ||
चीन के कूटनीतिक संस्थान चाइना इंटरनेशनल फाॅर स्ट्रेटिजिक स्टडीज वेबसाइट से जारी एक लेख मे चीनी विशेषज्ञ झान लुई का अपनी सरकार को भारत को 20 से 30 टुकड़ों में बंाटने की सलाह देने और उसके बाद भारतीय वायुसीमा में चीनी वायुयानों के माध्यम से पैकेट गिराना, भारतीय सीमा का उल्लंघन कर घुसपैठ करना आदि कार्य निश्चित रूप से चीन के विस्तारवादी इरादों को दर्शाते है। 1962 का युद्ध भी इसी पृष्ठभूमि से शुरू हुआ, जो कि प्रत्यक्ष हमले के रूप में प्रकट हुआ। उसके बाद भी चीन निरतंर भारत को अस्थिर करने में लगा रहा। जल-थल से भारत को घेराबंदी करके एक बार पुनः भारत को युद्ध के लिए उकसाने में लगा हुआ है। |
||
| Keywords | ||
| कूटनीतिक, मैकमोहन, रेड काॅरिडोर, हब्बन टोटा, पैगोडा प्वाइंट | ||
|
Statistics
Article View: 663
|
||


