साहित्य में वर्णित राजनीतिक मूल्य
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 136 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| सन्जू 1 | ||
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1एम. ए. हिन्दी (नेट) |
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| Abstract | ||
साहित्य ऐसा शस्त्र है जो बिना प्रहार के ही मनुष्य को निढ़ाल कर सकता है। नरेन्द्र कोहली के साहित्य में वर्णित राजनीतिक मूल्यों में आज की राजनीति की झलक दिखाई देती है। आज की राजनीति साम, दाम, दंड़, भेद की राजनीति रह गई है। राजनेता अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए जनता को प्रलोभन देते हैं। प्रजा के साथ खुला विश्वासघात करते हैं। राजनीति ऐसा कुचक्र है इसमें जो भी आता है वह इसी के रंग में रंग जाता है। आज राजनीति से सिद्धांत तथा आदर्श लुप्त होते जा रहे हैं। राजनीतिक मूल्यों से तात्पर्य है कि जो मूल्य नैतिक सामाजिक व धर्मानुरूप हंै। इसमें स्वतंत्रता, समानता व षांति समाहित हैं। भारतीय संस्कृति में राजनीति को मानव धर्म का निर्वाह करने वाली शक्ति के रूप में स्वीकारा गया है। हमारी संस्कृति प्रारम्भ से ही मूल्यों से ओत-प्रोत रही है। राम तथा कृष्ण जैसे महान राजनीतिज्ञ रहे हैं। उनकी शासन प्रणाली में सभी मूल्यों का पालन हुआ है। साहित्य समाज का दर्पण होता है। साहित्य के माध्यम से ही साहित्यकार समाज की धारणा तथा परम्पराओं को विचार का रूप देते हंै। साहित्य में साहित्यकारों ने जहाँ एक ओर स्वस्थ, सुदृढ और आदर्शमय प्रजातंत्र की स्थापना के लिए उपेक्षित राजनीतिक मूल्यों का चित्रण किया है वही दूसरी ओर उन्होंने सत्ता के लिए अपनाए जाने वाले हथकण्डों तथा राजनीतिक षड़यंत्रो का भी पर्दाफाश किया है। राजनीतिक मूल्यों व आदर्शों को अपनाकर कोई भी देश उन्नति तथा विकास की ओर अग्रसर हो सकता है। किसी भी देश की समृद्धि के लिए राजनीतिक मूल्य उसका आधार होता है। धर्म जाति और समाज की आड़ मंे जो विघटनकारी शक्तियाँ उभर रही हैं, उसमें मानवीय मूल्यों का विघटन हो रहा है। आज का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य उसके लिए आधार का कार्य कर रहा है। |
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| Keywords | ||
| आदर्श, जीवन, राजनीति, स्वार्थ, मूल्य | ||
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