सामाजिक विसंगतियों के संदर्भ में विभूति नारायण की लेखन दृष्टि
| Vol-4 | Issue-12 | December 2019 | Published Online: 16 December 2019 PDF ( 110 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| सुधीर सैनी 1 | ||
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1शोधार्थी, हिन्दी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
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| Abstract | ||
राय जी का जीवन दर्शन मानवतावादी है। उनका मानवतावाद सच्चे अर्थों में मनुष्यत्व का समर्थन करने वाला मानवतावाद है। राय जी हिन्दू-मुसलमान वैमनस्य के विरोधी है। उन्होंने शहर में कफ्र्यू उपन्यास में यह दर्शाया है कि-“धर्म की आड़ लेकर उच्च वर्ग के लोग दंगे करवाते है। जिसमें मध्यमवर्ग के लोग मारे जाते है। उनकी मान्यता यह है कि ‘कर्तव्य क्षेत्र में हिन्दू और मुसलमान का भेद नहीं, दोनों एक ही नाव में बैठे हुए है, डूबेंगे तो दोनों डूबेंगे, बचेंगे तो दोनों बचेंगे। राय जी की दृष्टि में धर्म का अर्थ कर्तव्य है। सच्चा धार्मिक वहीं है जो कर्तव्य का पालन करता है।“ राय जी का लक्ष्य समाज कल्याण या लोक मंगल की भावना है। उनकी मान्यता है कि समाज का कल्याण होने से सभी व्यक्तियों का कल्याण स्वयं ही हो जाता है। उनके सभी आदर्शवादी पात्र समाज के उन्नयन के लिए प्रयत्नशील दिखाई देते है। राय जी देख रहे कि समाज में बहुत बड़ी विषमता है। उच्च वर्ग निम्न वर्ग को उपेक्षित समझता है और उनका शोषण करता है। राय जी ने इसलिए सर्वहारा वर्ग के शोषित और पीड़ित व्यक्तियों को अपने हृदय में पूर्ण सहानुभूति दी। |
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| Keywords | ||
| दृष्टि, साहित्यकार, युग, लक्ष्य, शत्रु, मुक्ति पात्र, शोषण। | ||
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