समकालीन भारत और श्रीलंका द्विपक्षीय संबंध: एक विश्लेषण
| Vol-4 | Issue-8 | August 2019 | Published Online: 16 August 2019 PDF ( 268 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डॉ. जय कुमार झा 1 | ||
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1एसोसिएट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, के॰ एस॰ कॉलेज, दरभंगा (बिहार) |
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| Abstract | ||
भारत और श्रीलंका के द्विपक्षीय संबंधों का इतिहास 2,500 वर्षों से भी अधिक पुराना है, दोनों देशों की बौद्धिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई संबंधों की विरासत है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में महत्त्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। व्यापार और निवेश के साथ दोनों देशों के बीच अवसंरचना विकास, शिक्षा, संस्कृति तथा रक्षा क्षेत्र सहयोग में वृद्धि हुई है। ये ये अंतर्राष्ट्रीय मामलों के कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक आपसी समझ साझा करते हैं। ध्यातव्य है कि भारत और श्रीलंका सार्क (SAARC) और बिम्सटेक (BIMSTEC) के सदस्य है और सार्क देशों भारत का व्यापार श्रीलंका के साथ सबसे अधिक है। दिसंबर 1998 में एक अंतर सरकारी पहल के माध्यम से‘भारत-श्रीलंका फाउंडेशन’ (India-Sri Lanka Foundation) की स्थापना की गई, इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक, तकनीकी, शैक्षिक, सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत की ‘पड़ोसी देश प्रथम नीति’ या ‘नेबरहुड फर्स्ट नीति’ (Neighbourhood First Policy) और सागर सिद्धांत (SAGAR Doctrine) के तहत श्रीलंका के साथ भारत के संबंधों को विशेष और उच्च प्राथमिकता (Special and High Priority) देने की बात कही। ध्यातव्य है कि नई विदेश नीति में ‘भारत प्रथम दृष्टिकोण’ या ‘इंडिया फर्स्ट अप्रोच’ (India First Approach) को अपनाने और भारत के सामरिक रक्षा हितों की सुरक्षा पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान किया है। |
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| Keywords | ||
| शक्ति संरचना, नृजातीयता-समस्या, कूटनीतिक परिधि, द्विपक्षीय संबंध, सामरिक महत्व | ||
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