शिक्षा के उन्नयनार्थ मूल्य परक शिक्षा समसामयिक समाज की अनिवार्यता

Vol-4 | Issue-5 | May 2019 | Published Online: 25 May 2019
Author(s)
डाॅ0 सोनम शर्मा 1

1असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग, कु0 मायावती राज0 महिला स्ना0 महाविद्यालय, बादलपुर गौतमबुद्धनगर

Abstract

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हीगल के द्वन्द्ववाद के अन्तर्गत शिक्षा वाद से प्रतिवाद की प्रक्रिया से गुजरकर संवाद की प्रक्रिया में पहुंचने के लिये प्राथमिकी स्तर पर प्रयासरत है। समाज में विभिन्न प्रकार की विभीषकायें-भ्रष्टाचार, बेईमानी, अहिंसा, शोषण, लूटपाट, अधर्म आदि अपनी चरम सीमा पर है। शिक्षा ही एक ऐसा धारदार हथियार है जिससे इन विभीषकाओं को, आने वाले कल में काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिये शिक्षा को मूल्य परक शिक्षा बनाना हमारी प्रथम आवश्यकता है। मूल्य परक शिक्षा हेतु हमें जमीनी सार्थक प्रयास करने होगें-जैसे शिक्षा में नैतिक शिक्षा प्रत्येक स्तर पर पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंग हो। शिक्षक समाज का संरक्षक होता है अतः शिक्षकों को अपने व्यवहार में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करके आदर्श शिक्षक बनने का प्रयास करना होगा। परिणामस्वरूप विद्यार्थी भी स्वयं उन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करेगें। नैतिक शिक्षा को व्यावहारिक रूप में अमल करवाने के लिये, संदर्भित व्यक्तियों से पारदर्शिता व जबाबदेही की भी अपेक्षा वांछनीय है, तभी शिक्षा द्वारा समाज की दिशा-दशा दोनों में अपेक्षित सुधार हो पायेगा।

Keywords
मूल्य, हीगल, शिक्षा, विश्वगुरू।
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