शरीर शुद्धि एवं षटक्रम

Vol-5 | Issue-3 | March-2020 | Published Online: 16 March 2020    PDF ( 187 KB )
Author(s)
Santosh Rani 1

1M.A. Yoga (Net),Dept. of Phy.Education, Chaudhary Ranbir Singh University, Jind

Abstract

मनुष्य जीवन भगवान ने हमें अनेक योनियों के बाद दिया है वो भी बहुत अच्छे कर्मों को करने के बाद। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में रहतें हुए वह अपने कत्र्तव्य कर्मों को करता है। और अपने कार्यों को करते-करते वह अपने शरीर का ध्यान रखना भूल जाता है। इसलिए मनुष्य अनेक बिमारियों का शिकार हो जाता है। उन बिमारियों को ठीक करने के लिए योग में बहुत से उपचार है। उनमें से एक है षटक्रर्म। शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए हठयोग में षटक्रर्म क्रियाएं दी गई है। शरीर की शुद्धि एवं राजयोग में प्रवेशार्थ अपने शिष्यों को ऋषियों ने षटक्रर्म की शिक्षा का उपदेश दिया। ये क्रियाएं मानव-शरीर का कायाकल्प करके उसे रोगमुक्त, दीद्र्यायु, स्वस्थ, पुष्ट एवं कान्तिमय बनाती है। ‘‘षटक्रर्म की ये क्रियाएं स्थूल शरीर को शुद्ध करती हुई सूक्ष्म शरीर के शुद्धीकरण में भी अत्यन्त सहायक है। इन क्रियाओं के अभ्यास बीस प्रकार के कफरोग, सभी वातरोग, पित्तरोग, कुष्टरोग, उदर रोग, फुफ्फुस-विकार, हृदय एवं वृक्क की विकृतियां दूर होती है।’’ इसलिए शोधपत्र में हम घट (शरीर) शुद्धि की क्रियाओं का वर्णन करेंगे।

Keywords
घट, षटकर्म, शुद्धिकरण, हठयोग, आयुर्वेद, त्रिर्दोष शरीर, क्रान्तिमय, सूक्ष्म, ध्यान, वस्ति, न्यौलि।
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