वर्तमान परिदृश्य में भारत नेपाल संबधों का बदलता स्वरूप: सामान्य विश्लेषण

Vol-6 | Issue-05 | May-2021 | Published Online: 15 May 2021    PDF ( 152 KB )
DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i05.025
Author(s)
अनिल कुमार सरोवा 1

1शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चुरु (राज.)

Abstract

कोरोना काल में नेपाल की तराई के व्यापार को बहुत बड़ा झटका लगा है। सीमा सील होने के कारण नेपाल की तराई व नेपाल के पर्यटन पर जाने वाले भारतीयों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। कोरोना के साथ लिपुलेख, कालापानी विवाद ने नेपाल के प्रति भारतीयों की हमदर्दी भी कम हो गई है। यही कारण है नेपाल का पर्यटन उद्योग चैपट हो गया है और नेपाल की तराई के शहर व बाजारों से भी रौनक गायब हो गई है। भारत से जुड़ी नेपाल की लंबी सीमा में बिहार, उत्तर प्रदेश से सटे जिलों के लोगों से नेपाल की तराई के बाजारों में जो रौनक थी वह गायब हो चुकी है। भारतीय सीमा से जुड़े नेपाली बाजार में 80 प्रतिशत की खरीदारी भारतीय करते रहे। नेपाल की तराई में बसे मधेशी भारतीय मूल के नेपाली हैं और उनका समर्थन आज भी भारत के साथ है। नेपाल का हजारों करोड़ का व्यापार व पर्यटन भारतीयों के पैसे जीवित है। भारत नेपाल सीमा कोरोना को देखते हुए सील है। सिर्फ जिन्हें अनुमति मिली है, उन्हें ही प्रवेश मिल पा रहा है। इस बीच विवादित नक्शे को लेकर भी गतिरोध बरकरार है। दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों पर इसका असर दिखा है। ज्यादा प्रभाव इन दिनों खुदरा व्यापार पर पड़ा है। क्योंकि भारत एवं नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के ज्यादा लोग जरूरत की छोटी मोटी सामग्री की खरीदारी सीमा से लगे बाजारों से करते हैं। लेकिन हालात बदले तो सब कुछ ठप हो गया। करोड़ों का खुदरा व्यापार प्रभावित हुआ है। भारत और नेपाल दोनों देशों के सीमावर्ती बाजारों की रौनक समाप्त हो गई हैं। महराजगंज जिले से सटे नौतनवां, सोनौली, टूठीबारी, बरगदवा, कोल्हुई, भगवानपुर और नेपाल के दो जिला रूपनदेही, नवलपरासी से भैरहवां और बुटवल का बाजार, बेलहिया बाजार, महेशपुर, सिद्धार्थनगर व बलरामपुर से सटे कृष्णानगर, बहराइच से सटे बांके जिला नेपालगंज में तीन महीने के भीतर करोड़ों का खुदरा कारोबार प्रभावित हुआ है।

Keywords
सीमावर्ती, लिपुलेख, धार-चूला, कालापानी, पारगमन, शरणार्थियो, आई.एस.आई.
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