लार्ड इरविन की अक्तूबर 1929 की घोषणा का विश्लेषणात्मक अध्ययन
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 200 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Manjeet Singh 1 | ||
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1Mphil in History (UGC NET) |
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| Abstract | ||
1929 का वर्ष भारत के लिए अशान्ति एवं उथल-पुथल भरा वर्ष रहा। देश आर्थिक मन्दी से जूझ रहा था। कृषकों, मजदूरों, व्यापारियेां आदि की हालत ख्राब हो गई। मजदूर कारखानों में भूखे-प्यासे काम करते थे। उन्होंने बड़ी-बड़ी हड़तालें कर दीं। मजदूरों, किसानों तथा युवकों पर साम्यवाद का प्रीााव निरन्तर बढ़ता चला जा रहा था। परिणामस्वरूप मेरठ षड्यन्त्र केस हुआ जिसमें 30 साम्यावादी नेता गिरफतार कर लिये। कांगे्रस ने इस स्थिति का लाभ उठाने का प्रयास किया। उसने कलकत्ता अधिवेशन, 1928 में प्रस्ताव पास कर सरकार को धमकी दी कि यदि सरकार ने 31 दिसम्बर, 1929 तक नेहरू रिपोर्ट को स्वीकृत नहीं की तो उसे अंहिसात्मक असहयोग आन्दोलन का सामना करना पडे़गा। |
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| Keywords | ||
| विदेश नीति, राजनय, गुटनिरपेक्षता, कश्मीर समस्या, डोकलाम विवाद, संयुक्त राष्ट्र संघ, परमाणु परीक्षण। | ||
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