राष्ट्र राज्य की अवधारणा तथा राष्ट्र राज्य का शक्ति रचना दृश्य
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 204 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Roshan Nain 1 | ||
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1PGT in political science, Govt Girl senior secondary school KALWAN( JIND) |
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| Abstract | ||
जहाँ राष्ट्र व राज्य में एकरूपता हो वहां राष्ट्र राज्य विद्यमान होता है। राज्य जब राष्ट्र के अनुरूप होता है तो उसमें स्थायित्व व दृढ़ता पाई जाती है। भू-राजनीतिज्ञों के अनुसार राज्य राष्ट्र की राजनीतिक अभिव्यक्ति है जिसके रचनातंत्र में राष्ट्रीय हित, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय रक्षा को अखण्ड बनाये रखा जाता है। राष्ट्र स्वाभाविक विकास की लम्बी यात्रा का परिणाम है जो रीतिरिवाज, भाषा, धर्म आदि की एकता से स्थापित हुआ है। लगभग तीन शताब्दियों से भी अधिक समय में अन्तर्राष्ट्रीय जीवन के तरीकों से प्रभावित करने में एक सशक्त आधार की भूमिका निभाने का श्रेय जिसे जाता है उसे हम राज्य व्यवस्था कहते है। राज्य व्यवस्था को पाश्चात्य राज्य व्यवस्था, राष्ट्रीय राज्य व्यवस्था तथा राष्ट्र राज्य व्यवस्था आदि विभिन्न संज्ञाओं से सम्बोधित किया जा सकता है। |
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| Keywords | ||
| राष्ट्र राज्य, विदेश नीति, रीतिरिवाज, भाषा, धर्म। | ||
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