राष्ट्र निर्माण और डा0 अम्बेडकर
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 184 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| दिनेश कुमार 1 | ||
|
1सहायक प्रवक्ता राजनीति विज्ञान राजकीय महाविद्यालय जखोली जनपद - रूदप्राद (उतराखण्ड) |
||
| Abstract | ||
डा0 अम्बेडकर ने अपने समकालीनों के विपरीत भारत माता की अवधारणा को खारिज किया । उन्होने ‘बहिश्कृत भारत’ का विचार दिया, जो टुकडों में बटे इस देषे के यर्थाथ को प्रतिबिंबित करता था । भारत विभिन्न समुदायों और पहचानों का देष था । उस समय में तिलक तथा अन्य लोगों ने राश्ट्र् को एक करने के लिए ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदें मातरम्’ जैंसे नारों का उद्वोश किया । इन राश्ट्रवादियों को मनुवाद से केाई तकलीफ नही थी और वे साम्राज्यवादी सत्ता द्वारा महिलाओं की थिति में सुधार के हर प्रयास का पुरजोर विरोध करते थे । तिलक ने भारतीय संस्कृति की रक्षा के नाम पर ‘ऐज आफ कंसेट’ (वह आयु, जिसके बाद किसी व्यक्ति द्वारा किसी लडकी से यौन संबंध स्थापित करने की स्वीकृति को कानुनी वैधता प्राप्त होती है ) अधिनियम का कडा विरोध किया । इस प्रकार, राजनीति के क्षेत्र में लैंगिक के श्रेणीक्रम का बोलबाला था । |
||
| Keywords | ||
| महिला शोषण, सशक्तिकरण, समाज, राष्ट्र, लैंगिंग असमानता आदि। | ||
|
Statistics
Article View: 824
|
||

