राष्ट्रीय शिक्षा नीति: अध्यापक शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की भूमिका
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 148 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| श्री सच्चिदानन्द पाठक 1 | ||
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1असिस्टेंट प्रोफेसर, मगध कॉलेज ऑफ एजूकेशन दुबहल - गया (बिहार) |
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| Abstract | ||
देश के सर्वांगीण एवं बहुमुखी विकास के लिए शिक्षा की परम आवश्यकता है और अच्छी शिक्षा के लिए योग्य शिक्षकों की। योग्य शिक्षकों के लिए उच्चकोटि की शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है जो किसी उत्तम कोटि के शिक्षण संस्थान में ही सम्भव है। उत्तम कोटि के अध्यापक के द्वारा ही देश की भावी पी (बालक) के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास किया जा सकता है। सभी शिक्षक जन्मजात कुशल नहीं होते अतः शिक्षण कला में दक्षता एवं पूर्णता हेतु प्रशिक्षण आवश्यक है। भारत में स्वतंत्रता के पश्चात् बड़े पैमाने पर कुशल एवं योग्य शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए अध्यापक शिक्षा संस्थान स्थापित किये गये हैं। जहाँ भावी शिक्षकों का निर्माण किया जाता है। अध्यापक शिक्षा की गुणवत्ता को कायम रखने के लिए विभिन्न शिक्षा आयोगों ने अपनी संस्तुतियाँ प्रस्तुत की है। स्वायत्त संस्था के रूप में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 1993 से अध्यापक शिक्षा की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए कार्यरत रही है, बावजूद इसके वर्तमान समय में अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (प्रशिक्षण) में अनेकों दोष विद्यमान हैं। |
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