राजनीतिक व्यवस्था में संचार की भूमिकाः सामान्य विश्लेषण
| Vol-4 | Issue-9 | September-2019 | Published Online: 16 September 2019 PDF ( 123 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ. सतीश कुमार मीणा 1 | ||
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1शोधार्थी |
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| Abstract | ||
संचार साधनों के विकास ने मनुष्य को न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक मानव भी बना दिया है। संचार साधनों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर ही राजनीति विज्ञान में राजनीतिक संचार की संकल्पना का विकास किया गया है। आज राजनीतिक संचार राजनीति विज्ञान की वह महत्वपूर्ण अवधारणा बन चुका है जिसके बिना किसी राजनीतिक व्यवस्था के सम्पूर्ण ताने-बाने को समझना कठिन है। व्यक्ति का राजनीतिकरण केवल राजनीतिक संचार की व्यवस्था द्वारा ही किया जा सकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक व्यवस्थाओं में इस अवधारणा का महत्व अधिक हो गया है। राजनीतिक संचार ने राजनीतिक व्यवस्था को नई दिशा दी है। व्यक्ति की बढ़ती राजनीतिक सहभागिता व सक्रियता राजनीतिक संचार के महत्व को प्रतिपादित करती है। राजनीतिक व्यवस्था के निवेशों और निर्गतों को जोड़ने वाली कड़ी राजनीतिक संचार ही है। आज राजनीतिक संचार के बिना कोई भी संगठन तथा राजनीतिक व्यवस्था अपने उद्देश्यों तथा लक्ष्यों में सफल नहीं हो सकती। लोकतन्त्रीय शासन प्रणालियों में राजनीतिक संचार का जो महत्व है, वह सर्वाधिकारवादी राजनीतिक व्यवस्थाओं में भी है। राजनीतिक संचार राजनीतिक व्यवस्था के एक भाग से दूसरे भाग को जोड़कर राजनीतिक व्यवस्था को गतिशील बनाता है। इसी कारण आज राजनीतिक संचार को राजनीतिक व्यवस्था की रक्तधारा कहा जाने लगा है। |
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| Keywords | ||
| राजनीतिक व्यवस्था, लोकतंत्र, संचार, संकल्पना। | ||
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