मुस्लिम महिला एंव मानवाधिकार के सवाल: एक विश्लेषण
| Vol-4 | Issue-9 | September 2019 | Published Online: 16 September 2019 PDF ( 246 KB ) | ||
| Author(s) | ||
सुधा सिंह
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1शोधार्थी, राजनीति एंव लोकप्रशासन विभाग, डॉ हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय |
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| Abstract | ||
एक विचारधारा के रूप में स्त्री मानवाधिकार का विमर्श एक सशक्त बौद्धिक नारीवादी हस्तक्षेप हैं। 19वीं शताब्दी से यूरोप में प्रारम्भ स्त्री अधिकारों की मांग ने वर्तमान में वैश्विक स्वरूप ग्रहण कर लिया हैं। भारत उन कुछ देशों में से एक हैं जहाँ मानवाधिकार आन्दोलन का इतिहास उतार चढ़ाव से युक्त रहा हैं। भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान मुख्य लक्ष्य सिर्फ भारत की स्वंत्रता नहीं थी, बल्कि भारतीय लोगों के मूलभूत अधिकारों एंव स्वतंत्रताओं का संरक्षण एंव संवर्धन भी था। अहम प्रश्न यह है कि क्या आजादी के इतने सालों बाद भी स्त्रियाँ अपने मूलभूत अधिकारों को प्राप्त कर सकी हैं? इसमें मुस्लिम महिलाओं का प्रश्न अलग से इसलिए भी विचारणीय हो जाता हैं क्योंकि अन्य धर्म की महिलाओं की अपेक्षा मुस्लिम महिलायें ज्यादा पिछड़ी हुई हैं और यह सिर्फ उनके धर्म या ये कहें कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की वजह से हैं। जोकि उन्हें उनके मानवाधिकार प्राप्त होने के आडें आता हैं। |
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| Keywords | ||
| मानव अधिकार, मुस्लिम महिला, समानता, संवैधानिक अधिकार। | ||
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