मध्यकालीन भारत में स्त्रियों की सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में भूमिका
| Vol-4 | Issue-03 | March 2019 | Published Online: 13 March 2019 PDF ( 126 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| चरण सिंह 1 | ||
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1जे.बी.टी. अध्यापक गाॅव व डा.काब्रच्छा तहसील उचाना ;जीन्द |
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| Abstract | ||
किसी भी काल की संस्कृति का मूल्यांकन उस समय की स्त्रियों की स्थिति से लगाया जा सकता है। प्राचीन काल में ऐसे दृष्टान्त मिले हैं कि स्त्रियों ने राज्य का प्रशासन अपने हाथ में लिया। पूर्व मध्यकालीन युग में हर्ष के समय में उसकी बहन राज्यश्री अपने पति की मृत्यु के उपरान्त अपने भाइयों के साथ राज्य के प्रशासनिक कार्यों में मन्त्ररणा देती थी। राज्य दरबार में आदर का स्थान प्राप्त था। हर्ष के समय में वे महलों की देखभाल के लिए ‘प्रतिहारी’ के पद पर रखी जाती थीं। वे राजकीय छत्र और पुष्पदान को धारण करती थीं और चैरी घुमाती थीं। वे पान और फूल भी महल के लोगों को पहुंचाती थीं। राजमहल के उत्सवों में संगीत व नृत्य में भाग लेती थीं। कभी-कभी उनका उपयोग शत्रु के प्रदेश में गुप्तचरों के रूप में भी किया जाता था। वे राजा के साथ शिकार पर भी जाती थी। दक्षिण भारत के वृतान्तों से हमें पता चलता है कि स्त्रियाँ पुरूष वर्ग के अधीन नहीं थीं। राजपूत काल में राजकीय परिवारों की लड़कियों को प्रशासन कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता था। कश्मीर और दक्षिण भारत में भी कई दृष्टान्त मिलते हैं, जहाँ स्त्रियों ने देश की बागडोर अपने हाथ में ली। काकतीय राज्य की रदम्बा ने 40 वर्ष तक राज्य किया। राजमहलों में स्त्रियाँ ही राज किया करती थीं। राजमहलों में स्त्रियाँ परिचायकों के रूप में भी कार्य करती थीं। वे अंगरक्षकों के पद पर नियुक्त की जाती थीं। अपने इस शोध-पत्र में हम मध्ययुगीन भारत में स्त्रियों की सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में भूमिका पर नज़र डालेंगें। |
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| Keywords | ||
| सामाजिक, राजनीतिक, मुगल, सल्तनतकाल, मुस्लिम समाज, व्यापार, प्रशासनिक, जागीर, हिन्दू, जागीर, उपाधि | ||
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