बिरहोर जनजाति के आर्थिक जीवन के विभिन्न आयामों में आये परिवत्र्तन का समीक्षात्मक अध्ययन
| Vol-2 | Issue-1 | January 2017 | Published Online: 19 January 2017 PDF ( 109 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| अरविन्द कुमार उपाध्याय 1; डाॅ0 सुधीर कुमार सिंह 2 | ||
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1शोधार्थी विषय-इतिहास जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा। 2शोध-निर्देशक असिस्टेंट प्रोफेसर (सि0 स्केल) पी0जी0 डिपार्टमेंट आॅफ हिस्ट्री, जे0पी0 युनिवर्सिटी, छपरा। |
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| Abstract | ||
सभी जाति, वर्ग, सम्प्रदाय चाहे वो शहर, ग्राम या किसी भी जनजाति का हो उसे देश की आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने का पूरा-पूरा हक है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत अधिक अनुसंधान अध्ययन विभिन्न वर्गों, जातियों, शहरी क्षेत्रों, ग्रामीण क्षेत्रों इत्यादि पर किये गए है। परंतु जनजातियों के आर्थिक जीवन एवं गतिविधियों पर अध्ययन की कमी है। अतः यह अध्यन इस कमी को पूरा करने के लिए एक प्रयास है, जो जनजातियों के आर्थिक गतिविधि को आगे बढ़ाने में एक नया आयाम साबित हो सकता है। यह अनुसंधान बिरहोर जनजाति जिनका निवास स्थान छोटानागपुर के घने जंगलों में है। इन्हीं के आर्थिक जीवन से संबंधित है। यह अध्ययन वर्णात्मक प्रणाली पर आधारित है। इस अध्ययन से पता चलता हे कि बिरहोर जनजाति अपने जीवन-यापन एवं आर्थिक जरुरतों के लिए मूल रुप से जंगलों एवं उसमें पायी जाने वाली चीजों पर निर्भर है। अकुशल एवं अशिक्षित होने के वजह से यह जंगल में पायी जाने वाली महत्त्वपूर्ण चीजों का भी सदुपयोग सही ढंग से नहीं कर पाते, जिससे इनकी स्थिति मेहनत करने के बावजूद दयनीय बनी रहती है। जिससे इनके बच्चे अधिकांशतः कुपोषण के शिकार हो जाते हैं और इनका जीवनकाल जल्द हीं समाप्त हो जाता है। इस जनजाति को भी विकास की दौड़ में शामिल करने की जरुरत है, ताकि देश को आर्थिक गतिविधियों में अग्रणि पंक्ति में लाया जा सके। इनके विकास के लिए सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक रुप से बिरहोर जनजाति को महत्त्वपूर्ण माना जाए और इनका विकास किया जाए। |
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| Keywords | ||
| बिरहोर जनजाति, आर्थिक जीवन, आदिवासी | ||
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