बिजनौर जनपद में सामाजिक-आर्थिक अवस्थापनात्मक तत्वों के परिवर्तित स्वरूप का अध्ययन
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF ( 287 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डा0 रश्मि शर्मा रावल 1; नरेश कुमार 2 | ||
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1शोध पर्यवेक्षक, विभागाध्यक्ष एंव एसोसिएट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, आर0 एस0 एम0(पी0जी0)काॅलेज, धामपुर, बिजनौर(उ0प्र0) 2शोधार्थी, भूगोल विभाग, आर0 एस0 एम0(पी0जी0)काॅलेज, धामपुर, बिजनौर(उ0प्र0) |
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| Abstract | ||
किसी प्रदेश की अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अनिर्वाय एंव आधारभूत तत्व की परिस्थितयाँ एंव व्यवस्थाऐं अवस्थापना तत्व कहलाते हैं। अवस्थापनात्मक तत्वों के अन्र्तगत किसी प्रदेश या स्थान विशेष की उन्नति के निर्धारण हेतु आधारभूत सुविधाऐं, साधन सेवाऐं, सरकारी एंव प्रशासनिक क्षेत्र की सेवाओं को भी सम्मिलित किया गया है। किसी भी क्षेत्र विशेष की अर्थव्यवस्था तथा उसके विकास प्रक्रिया की गति सामान्यतः उन्हीं तत्वों पर आधारित होती है। प्रस्तुत शोध पत्र में बिजनौर जनपद में सामाजिक-आर्थिक अवस्थापनात्मक तत्वों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य के सन्र्दभ में अध्ययन किया गया है। अध्ययन क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक अवस्थापनात्मक तत्वों के अन्र्तगत शिक्षण संस्थाऐं, परिवहन सेवाऐं, वित्तीय संस्थाऐं एंव विपणन केन्दªों का अध्ययन किया गया है। जनपद में सामाजिक-आर्थिक अवस्थापनात्मक तत्वों का आकलन करने के लिए इन तत्वों में हुए परिवर्तन को आधार बनाया गया है। जिसकी गणना हेतु जिला सांख्यिकीय पत्रिका वर्ष 1995, 2005 तथा 2015 का उपयोग किया गया है। अवस्थापनात्मक तत्वों के अन्र्तगत शिक्षण संस्थाऐं, परिवहन सेवाऐं, वित्तीय संस्थाऐं एंव विपणन केन्दªों में हुए परिवर्तन का परिकलन सम्पूर्ण जनपद स्तर पर किया गया है। सामाजिक-आर्थिक अवस्थापनात्मक तत्वों के द्वारा किसी क्षेत्र के प्राकृतिक एंव आर्थिक व्यवस्थाओं में मात्रात्मक एंव गुणात्मक परिवर्तन करके इसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास किया जा सकता है। |
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| Keywords | ||
| सामाजिक, आर्थिक, अवस्थापनात्मक तत्व। | ||
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