बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु सरकारी प्रयास

Vol-4 | Issue-01 | January 2019 | Published Online: 20 January 2019    PDF ( 338 KB )
Author(s)
सुदेश कुमारी 1

1प्राध्यापिका, वैश्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रोहतक

Abstract

किसी भी राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। महिला और पुरूष दोनों समान रूप से समाज के दो पहियों की तरह कार्य करते हैं और समाज को प्रगति की ओर ले जाते हैं। स्वामी विवेकानंद के अनुसार “समाज का सुधार तब तक नहीं हो सकता जब तक महिलाओं की स्थिति में सुधार नहीं आता क्योंकि कोई भी पक्षी कभी भी एक पंख से उड़ान नहीं भर सकता”। दोनों की समान भूमिका को देखते हुए यह आवश्यक है कि उन्हें शिक्षा सहित अन्य सभी क्षेत्रों में समान अवसर दिए जाएं। क्योंकि यदि कोई एक पक्ष भी कमजोर होगा तो सामाजिक प्रगति संभव नहीं हो पाएगी। परन्तु देश में व्यवहारिकता शायद कुछ अलग ही है, वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में महिला साक्षरता दर मात्र 64.46 फीसदी है, जबकि पुरूष साक्षरता दर 82.14 फीसदी है। उल्ल्लेखनीय है कि भारत की महिला साक्षरता दर विश्व के औसत 79.7 प्रतिशत से काफी कम है। वैश्विक लैंगिक अंतर रिर्पोट, 2017 के अनुसार, भारत शैक्षिक उपलब्धि में विश्व के 144 देशों में 112 वें स्थान पर है और अगर आर्थिक सहभागिता एवं अवसर को देखा जाये तो भारत का स्थान 139 वां है, जो बहुत ही दयनीय है। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा जारी रिर्पोट में कहा गया था कि 15-18 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 39.4 प्रतिशत लड़कियां स्कूली शिक्षा हेतु किसी भी संस्थान में पंजीकृत नहीं हैं और इसमें से अधिकतर या तो घरेलू कार्याें में सलंग्न होती है या भीख मांगने जैसे कार्यों में। महिलाओं की ऐसी स्थिति शोध का विषय है।
प्रस्तुत शोधपत्र में शोधकत्र्री द्वारा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु सरकारी प्रयासों को जानने का प्रयास किया है। जहां विश्वभर में नारी सशक्तिकरण के प्रयास किए जा रहे हैं, शिक्षा में लैंगिक अंतर को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की बात की जा रही है वहीं भारत में केन्द्रीय स्तर व राज्य स्तर (हरियाणा) पर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु सरकारी प्रयासों को भी जानना आवश्यक है।

Keywords
बालिका शिक्षा, सशक्तिकरण, लैंगिक असमानता, सरकारी प्रयास, प्रोत्साहन, योजना इत्यादि।
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