प्रेमचन्द के उपन्यासों की नारियाँ और नवजागरण
| Vol-4 | Issue-04 | April 2019 | Published Online: 15 April 2019 PDF | ||
| Author(s) | ||
| डॉ. अनीता मिंज 1 | ||
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1असिस्टेंट प्रोफेसर, दौलतराम महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय |
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| Abstract | ||
प्रेमचंदयुगीन काल संक्रांति का काल था। फलस्वरुप नवजागरण का प्रचार-प्रसार सभी क्षेत्रों में जोरों पर था। प्रेमचंद जी भी इससे अछूते नहीं रहे । उनके उपन्यासों में नारियां भी उत्तरोत्तर सभी क्षेत्रों में जागरूक दिखाई पड़ती हैं। यही कारण है कि वे राजनीति, स्त्री शिक्षा, स्त्री स्वतंत्रता, तलाक़ आदि सभी मुद्दों पर बातचीत के साथ ही बराबरी की भागीदारी दिखलाती हैं। प्रारंभिक उपन्यासों में थोड़ा बहुत शोषण, अत्याचार आदि झेलती हैं पर उत्तरोत्तर उनके उपन्यासों में नारियों का जागृत एवं नवचेतन रूप दिखाई पड़ता है। |
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| Keywords | ||
| स्त्री शिक्षा, स्वावलंबी नारी, जागरुक एवं निडर नारी, राजनैतिक भागीदारी, नारी स्वतंत्रता । | ||
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