प्रेमचंद की कहानियों में नारी जीवन का यथार्थ चित्रण

Vol-4 | Issue-6 | June 2019 | Published Online: 12 June 2019    PDF ( 114 KB )
Author(s)
डाॅ0 डेजी कुमारी 1

1एम0ए0 (हिन्दी), बी0एड0 पी-एच0डी0

Abstract

प्रेमचंद के आगमन से हिन्दी कथा-क्षेत्र में एक नवीन एवं वास्तविक युग का आरंभ होता है। उन्होंने पहली बार कथा-साहित्य के क्षेत्र, स्वरूप और उद्देश्य को पहचाना ही नहीं प्रत्युत उसे भव्य समृद्धि प्रदान की, काफी ऊँचाई तक ले गए। यही कारण है कि उन्हें ‘कथा-सम्राट’ के रूप में भी जाना जाता है। कथा में उपन्यास और कहानी दोनों आते हैं। अतः उन्हें ‘उपन्यास सम्राट’ और ‘कहानी सम्राट’ के रूप में भी समझा जा सकता है, इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। प्रेमचंद नारी जीवन के अनूठे चित्रकार थे। उन्होंने लगभग तीन सौ कहानियाँ लिखी है। इन कहानियों में नारी जीवन प्रधान कहानियों की संख्या पचास के करीब है। इन कहानियों में ‘निर्वासन’, ‘नैराश्य’, ‘घासवाली’, ‘बूढ़ी काकी’, ‘बड़े घर की बेटी’, ‘सौत’, ‘सती’, ‘कुसुम’, ‘वेश्या’, ‘नरक का मार्ग’, ‘मंदिर’, ‘कफन’, ‘सोहाग का शव’, ‘विमाता’, ‘बेटों वाली विधवा’, ‘सुहाग की साड़ी’, ‘सुभागी’, ‘उद्धार’, ‘धिक्कार’ आदि प्रमुख है। प्रायः सभी नारी प्रधान कहानियों में नारी पात्रों की सशक्त उपस्थिति देखी जा सकती है। प्रेचचंद ने अपनी कहानियों में नारी जीवन का यथार्थ चित्रण किया है। उनकी नारियों का समाज ऐसा नहीं है, जहाँ नारियाँ सुख और सम्मान से जी सके। प्रेमचंद की कहानियों की नारियाँ त्रस्त जीवन जीने को विवश है। उनकी कहानियों में नारी जीवन की त्रासद दशा की करूण प्रतिध्वनि को तीव्रता से सुना जा सकता है। समग्रतः कहा जा सकता है कि उनकी कहानियों का नारी-जीवन उपेक्षा और यंत्रणा से परिपूर्ण हैं, अत्यंत नारकीय है, जो एक भयानक कारूणिक चित्र उपस्थित करता है। प्रेमचंद शताब्दियों से पद्दलित, अपमानित, शोषित, पीड़ित, वंचित एवं असहाय, नारी जाति की महिमा के जबरदस्त वकील थे। नारी जीवन के एक अनूठे प्रवक्ता के रूप में नारी जीवन को कष्टरहित एवं सुखमय बनाने की उनकी प्रतिबद्धता हिन्दी नारी कथा साहित्य के इतिहास में अद्वितीय, अतुलनीय एवं अविस्मरणीय है।

Keywords
प्रेमचंद, नारी-जीवन, कफन, बूढ़ी-काकी, मंदिर, निर्वासन, नैराश्य
Statistics
Article View: 983