पटना कलम शैली: एक ऐतिहासिक अध्ययन
| Vol-3 | Issue-09 | September 2018 | Published Online: 07 September 2018 PDF | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ॰ राजीव नयन 1 | ||
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1एसोसिएट प्रोफेसर-सह-विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, जगजीवन काॅलेज, आरा, वीर कुँवर सिंह विष्वविद्यालय, आरा, भोजपुर, बिहार। |
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| Abstract | ||
मुगलों के आगमन के बाद भारतीय चित्रषैली को एक नया आयाम मिला और उनकी शैली ने चित्रकला के कई ऐसे भारतीय स्कूलों को प्रभावित किया जिनकी उत्पत्ति बाद में हुई थी। ‘पटना कलम शैली’ या ‘पटना स्कूल आॅफ पेंटिंग’ उन ‘स्कूलों’ में से एक था, जो बिहार में 18वीं से 20वीं शताब्दी के शुरूआती दिनों में मुगल चित्रकला का एक आदर्ष था। मुगल शाही कला और स्थानीय लोक कला के सम्मिश्रण में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की कला शैली के समावेष ने ‘पटना कलम’ को विषिष्ट बना दिया। कालान्तर में, जब गाँधीजी ने विदेषी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया तो ‘पटना कलम’ के चित्रकारों के समक्ष कंपनी शैली के प्रभाव से मुक्त होने का संकट उत्पन्न हो गया। वस्तुतः, उन्होंने महसूस कर लिया था कि भारतीय कला की रूह लोकजीवन में पल्लवित-पुष्पित होती है। |
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| Keywords | ||
| भारतीय चित्रकला, मुगल कला शैली, स्थानीय लोक कला शैली, कलात्मक तकनीक | ||
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