नेपाल में बढ़ता पाकिस्तानी प्रभाव एवं भारत विशेष सन्दर्भ में: अवलोकन

Vol-4 | Issue-9 | September 2019 | Published Online: 16 September 2019    PDF ( 134 KB )
Author(s)
Dr. Vishal Singh 1

1Assistant Professor, S.R.S.PG. College, Kumhar, Bharatpur, Rajasthan (India)

Abstract

काठामाण्डू से प्रकाशित नेपाली पत्रिका ‘राष्ट्रीय मंच’ ने अपने जनवरी 2002 के अंक में लिखा है कि “नेपाल में भारत विरोधी भावना कुछ वर्षों से है और इसके कई कारण है-पुरानी पंचायत व्यवस्था मूलतः भारत विरोधी भावना पर आधारित थी। राष्ट्रवाद के नाम पर इस व्यवस्था के लोग भारत का विरोध करते थे और प्रजातन्त्र के नाम पर नेपाली कांगे्रसी का। नेपाल में किसी संस्था या कार्य की राष्ट्रभक्ति का एक ही पैमाना है कि उसने कितनी बार भारतीय मूल्यों और सिद्धान्तों के खिलाफ आवाज उठाई है। परन्तु चिन्ता की बात यह नहीं। चिन्ता की बात यह है कि इस स्थिति का लाभ एक तीसरा देश पाकिस्तान उठाता है। उदाहरण के तौर पर रितिक रोशन काण्ड के दौरान देश भर में भारत के खिलाफ प्रदर्शन और हिंसक घटनायें हुई। बाद में नेपालियों को पता चला कि इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है। बहरहाल इससे नेपाल को ही ज्यादा नुकसान हुआ। रितिक रोशन काण्ड से नेपाल के मद्धेशियों और गैर मद्धेशियों के बीच कटुता बढ़ गई तथा नेपाल का पर्यटन व्यवसाय संकट मे पड़ गया। इसी प्रकार अब भारत और चीन के बीच विवाद बढ़ गया था तो उस समय नेपाल के कुछ नेता जो अपने को राष्ट्रवादी कहते थे वास्तव में चीन की तरफ झुक गये थे और भारत विरोधी लहर को हवा दे रहे थे। परन्तु इस सारी स्थिति के लिए केवल नेपाल ही जिम्मेदार नहीं। भारत ने भी कई भूले की हैं। नेपाल में इस बात को लेकर बहुत ही हो-हल्ला मचाया गया कि भारत द्वारा सियासवाल खुर्दलोटन बांध के निर्माण से ‘लुम्बिनी’ डूब जायेगी। भारत सरकार समय से नेपाल को नहीं समझा सकी कि ऐसी कोई बात नहीं। ‘लुम्बिनी’ को कोई खतरा नहीं है।“

Keywords
आर.डी.एक्स., आई.एस.आई., राॅ, माओवादियों, शिखर सम्मेलन, प्रतिनिधियों।
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