“डाॅ. रामविलास शर्मा का आलोचनात्मक भाषिक चिंतन”
| Vol-4 | Issue-8 | August 2019 | Published Online: 16 August 2019 PDF ( 123 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| रघुवीर शर्मा 1 | ||
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1शोधार्थी, हिन्दी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
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| Abstract | ||
डाॅ. राम विलास शर्मा माक्र्सवाद को जन कल्याण अथवा गरीबी की शोषण से मुक्ति का माध्यम मानते है। रामविलास जी का समग्र लेखन एक सांस्कृतिक अनुष्ठान जैसा है जो भारत को शक्ति सम्पन्नता टज्ञेश्र आत्मविश्वास से भरकर उसके मनोबल को बढ़ाने वाला है। रामविलास जी की आलोचना का एक एक शब्द गेंहूँ के अमूल्य दाने की तरह है उसे अपने साहित्यिक खलियान और जीवन के खलियान में बचा कर रखने की जरूरत है। राम विलास जी ऐसे आलोचक है जो भाषा समस्या का सामना पूरी प्रतिबद्धता तथा ईमानदारी से करते है। रामविलास जी का लेखन, विशेषतः भाषा और इतिहास पर लेखन लगातार विवादों के घैरे में रहा है किंतु हिन्दी आलोचना की भाषा के निर्माण में रामविलास जी का योगदान महत्वपूर्ण है। |
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| Keywords | ||
| राष्ट्रवादिता, अनुष्ठान धर्मनिरपेक्षता, बहुज्ञता, संकीर्णवाद, सम्प्रदायवादी, पुनव्र्याख्या, माक्र्सवाद, विच्छिन्न, अनुषांगिक, ध्यानाकर्षण, अवधारणा। | ||
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