कृदन्त विश्लेषक एवं ससूत्ररूपसिद्धि सिस्टम का विकास
| Vol-6 | Issue-11 | November-2021 | Published Online: 12 November 2021 PDF ( 587 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.31305/rrijm.2021.v06.i11.007 | ||
| Author(s) | ||
सुमित शर्मा
1;
सुभाष चंद्र
2
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1पीएच.डी. शोधच्छात्र, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, भारत 2सहायक आचार्य, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, भारत |
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| Abstract | ||
संस्कृत भाषा का साहित्य बहुत ही समृद्ध है । प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान की सभी परम्पराएं इस भाषा में ही उपलब्ध हैं । अतः प्राचीन भारत के प्रगत विज्ञान, तकनीक एवं अन्य परम्पराओं को समझने के लिये संस्कृत भाषा का सम्यक ज्ञान होना अत्यावश्यक है । किसी भी भाषा को समझने के लिए व्याकरण का समुचित ज्ञान होना अत्यावश्यक होता है । पाणिनि द्वारा लिखित अष्टाध्यायी संस्कृत का प्रमुख व्याकरण है । लगभग 4000 से भी कम सूत्रों में लिखे गए इस व्याकरण की संरचना एक आधुनिक कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा के ही समान है । संस्कृत में पद (शब्द) दो प्रकार के होने हैं क्रियापद एवं नामपद । नामपद में समास, तद्धित, स्त्रीप्रत्ययान्त शब्द एवं कृदन्त आदि शामिल होते हैं । संस्कृत साहित्य में इन कृदन्तों का प्रयोग प्रचुर मात्रा में होता है । सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में एवं स्मार्ट फ़ोन तथा कम्प्यूटर डिवाइसेज़ के बढ़ते प्रयोग से ज्ञान परम्परा के आदान प्रदान के माध्यमों में परिवर्तन आया है । भारी भरकम पुस्तकों का स्थान ई-पुस्तकों एवं ऑनलाइन सामग्रियों ने ले लिया है । यद्यपि सभी विषयों के लिए ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध हैं परन्तु संस्कृत भाषा के लिये इसकी बहुत कमी है । इसी कड़ी में संस्कृत को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए यह एक प्रयास है । प्रस्तुत शोधपत्र का प्रमुख उद्देश्य संस्कृत कृदन्तपदों (participles) के विश्लेषण एवं पाणिनि सूत्रों के आधार पर उनके निर्माण की सम्पूर्ण प्रक्रिया के लिए एक विकसित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को प्रस्तुत करना है । इस सिस्टम को विकसित करने के लिए पाणिनीय व्याकरण के सूत्रों, प्रत्ययों तथा धातुओं के विभिन्न डेटाबेस की सहायता से कृदन्तपदों के विश्लेषण किया गया है । साथ ही साथ इसी विश्लेषण के आधार पर यह सिस्टम रुपसिद्धि भी प्रदान करता है । यह सिस्टम दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की वेबसाईट http://cl.sanskrit.du.ac.in पर उपलब्ध है । यह सिस्टम प्रभावी तरीके से ऑनलाइन माध्यम द्वारा शिक्षण और शोध के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है । साथ ही यह भावी शोधार्थियों को उचित मार्गदर्शन के साथ ही साथ अन्तर्विषयक शोधकार्य करने की प्रेरणा भी प्रदान करता है । |
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| Keywords | ||
| संस्कृत रूपसिद्धि प्रक्रिया, पाणिनि, अष्टाध्यायी, सिद्धान्तकौमुदी, संस्कृत-कृदन्त, संस्कृत शब्दरूप, प्रकृति-प्रत्यय विभाग, कृदन्त प्रकरण, संस्कृत का डिजटलीकरण, Sanskrit words Search, Sanskrit Participles | ||
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