उत्तराखण्ड में अनुसूचित जनजातियांः एक भौगोलिक अध्ययन
| Vol-2 | Issue-11 | November 2017 | Published Online: 30 November 2017 PDF ( 1 MB ) | ||
| Author(s) | ||
| डाॅ0 अंजली पुनेरा 1 | ||
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1एसोेसिएट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, राधेहरि राज0 स्नातकोत्तर महा0 काशीपुर, ऊधम सिंह नगर |
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| Abstract | ||
हिमालय प्रदेष के अन्य राज्यों की ही तरह उत्तराखण्ड राज्य की संास्कृतिक दुष्टि से विभिन्न संस्कृतियों का क्षेत्र रहा है। देष में कुल अनुसूचित जनजातियो की संख्या 104281034 है। 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य में अनुसूचित जनजाति की कुल संख्या 291903 है जो राज्य की कुल जनसंख्या का 2.9 प्रतिषत है। उत्तराखण्ड की प्रमुख जनजातियां वनराजी , गोरखा, थारू, बोक्सा व जौनसारी है। उत्तराखण्ड अनुसूचित जाति के निवास स्थान या तो सूदुर पर्वतीय क्षेत्र में है या तराई भाबर की संकीर्ण पेटी मे है। आधुनिक सभ्यता यहां बहुत तेजी से पहुंच रही है जिसका प्रभाव इनकी सामाजिक परम्पराओं और संस्कृति पर पढ रहा है। जनजाति का औसत लिंगानुपात 936 है। सभी जनजातियों का सामाजिक तानाबाना व संस्कृति एक दूसरे से भिन्न है। इसलिये इनका जीवन का संघर्ष भी इनकी भौगोलिक परिस्थितियों की तरह एक दूसरे से भिन्न है। भोटिया जनजाति में षिक्षा का प्रसार सर्वाधिक है। जबकि वनराजी इसमें अभी पीछे छूट गये है। सरकार की कइ्र योजनाये इन्हीं लोगो को केन्द्र में रखकर बनायी गयी है। |
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| Keywords | ||
| अनुसूचित जनजाति , वनराजी, थारू, बोक्सा, भोटिया , जौनसारी ! | ||
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