अवसर व त्रासदी के बीच तालाबों की भूमिकाः बिहार के एक ग्राम आधारित अध्ययन
| Vol-4 | Issue-01 | January 2019 | Published Online: 20 January 2019 PDF ( 379 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| आलोक कुमार 1 | ||
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1शोध छात्र, गोविन्द बल्लभ पन्त सामाजिक विज्ञान संस्थान झूंसी, प्रयागराज |
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| Abstract | ||
यह पेपर बिहार के मींव-सुखारीपुर गांव के क्षेत्र सर्वेक्षण पर आधारित है। विभिन्न सामाजिक समूहों के साक्षात्कार के आधार पर यह देखने को मिला कि तालाब लोगों की समृद्धि एवम् आवश्यकता पूर्ति का आधार है। जो तालाब कभी वंचित समुदायों के लिए आजीविका का साधन रहा है, वह आज इसके लगातार अवनयन के कारण वंचितों के लिए त्रासदी बन गया है। जो दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति अन्य स्रोतों से कर लेते हैं, उनके लिए तालाब महज जमीन का टुकड़ा है तथा वे इसे अवसर के नज़रिए से देखते हैं और जिनके पास ज़मीन नहीं है, जरुरतों के साथ दैनिक आवश्यकताएं भी अधूरी रह जाती हैं, उनके लिए त्रासदी है!! |
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| Keywords | ||
| वंचित समुदाय, त्रासदी, सार्वजनिक संपत्ति, सतत विकास, आजीविका। | ||
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