अनुसूचित जाति के विधानमंडलीय अभिजन: भूमिकाएं एवं संपर्क संबंधों का समाजशास्त्रीय अध्ययन (उत्तर प्रदेश की 17वीं विधानसभा के विशेष संदर्भ में)

Vol-4 | Issue-6 | June 2019 | Published Online: 12 June 2019    PDF ( 314 KB )
Author(s)
हर नाम सिंह 1; डॉ. यू. वी. सिंह 2

1शोध छात्र, समाजशास्त्र, सिंघानिया विश्वविद्यालय, झुंझुनू (राजस्थान)

2शोध निर्देशक, सिंघानिया विश्वविद्यालय, झुंझुनू (राजस्थान)

Abstract

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330 तथा 332; राजनैतिक क्रियाओं में सहभागिता के लिए राज्यों की अनुसूचित जातियों, जनजातियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में समान अवसर प्रदान करने हेतु स्थान आरक्षित करते हैं ताकि विकास की प्रक्रिया में आम जनों के साथ समाज के शोषित, वंचित तथा पीड़ित व्यक्ति भी राजनीतिक भागीदारी कर सके| अभिजनों की पृष्ठभूमि जानना, चुनाव लड़ने के कारणों तथा चुनाव के दौरान जनता से किए वादों की जानकारी करना; और उनके भूमिका निर्वहन व संपर्क संबंधों का अध्ययन करना है| शोध छात्र ने उत्तर प्रदेश की 17 वीं विधानसभा के अनुसूचित जाति के कुल 96 (93 एम.एल.ए. तथा 3 एम.एल.सी.) विधानमंडलीय अभिजनों का अध्ययन किया है| 75% अभिजनों ने जनता की सेवा करना, 58.33% ने राजनैतिक शक्ति प्राप्त करने के लिए, 66.67% सवर्ण लोगो द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों, उत्पीड़न से बचाव हेतु एवं 33.33% अभिजनों ने अन्य कारणों (अपनी जाति की सेवा, उत्थान, विकास कार्य कराने तथा शासन द्वारा दी जा रही विकास धन राशियों में किए जा रहे भ्रष्टाचार को रोकने) से चुनाव लड़े| परंतु अनुसूचित जाति अभिजनों द्वारा चुनाव लड़ने का मुख्य कारण ‘जन सेवा करना’ रहा है|

Keywords
विधानमंडलीय अभिजन, अनुसूचित जाति, चुनाव, राजनीतिक भागीदारी
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